पूर्व सांसद एएम करीम ने सीकर में कहा कि आज पूरे देश का मजदूर वर्ग सार्वजनिक उद्योगों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार इन उद्योगों को प्राइवेटाइजेशन के माध्यम से पूंजीपतियों के हक में बेच रही है।
मजदूर विरोधी कानूनों का विरोध
करीम ने बताया कि आज़ादी के बाद बनाए गए कुल 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार मजदूर विरोधी कोड लागू कर दिए गए हैं। सरकार 1 अप्रैल से इन कानूनों को लागू करने की तैयारी में है। उन्होंने कहा, “देश का मजदूर वर्ग इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा।”
देशव्यापी हड़ताल का ऐलान
एएम करीम ने जानकारी दी कि सीटू और 10 अन्य केंद्रीय ट्रेड यूनियन के साथ स्टील, कोयला, आंगनवाड़ी, मिड डे मील और भवन निर्माण वर्कर समेत तमाम क्षेत्र के वर्कर 12 फरवरी को अखिल भारतीय हड़ताल करेंगे।
अमेरिकन साम्राज्यवाद पर भी टिप्पणी
अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक संगठन के महामंत्री और साइप्रस के पूर्व श्रम मंत्री निखालिष ने कहा कि दुनिया में अमेरिकन साम्राज्यवाद की दादागिरी चल रही है। उन्होंने अमेरिका द्वारा वेनजुएला के राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार करने की घटना की निंदा की।
सामाजिक सुरक्षा कानूनों की रक्षा जरूरी
सीटू के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष एम साई बाबू ने कहा कि निर्माण मजदूरों के सामाजिक सुरक्षा कानून 1996 और माइग्रेंट वर्करों के लिए बने कानून 1970 को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मजदूर संगठनों को मजबूत करने पर जोर दिया।
सम्मेलन में बड़ी भागीदारी
सीटू के सम्मेलन में देशभर से 500 से अधिक डेलीगेट्स शामिल हुए। एएम करीम ने उपस्थित मजदूरों और प्रतिनिधियों से संघर्ष और एकजुटता बनाए रखने की अपील की।
