Rajasthan Politics News: राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि प्रदेश में पंचायत और शहरी निकाय चुनाव 31 जुलाई तक हर हाल में करवाए जाएं. अदालत ने साफ कहा कि चुनाव प्रक्रिया में अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने शुक्रवार को इस मामले में सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 20 जून तक वार्ड परिसीमन और मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी करने के आदेश दिए. कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर मतदाता सूची अपडेट करने में और देरी होती है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की मानी जाएगी.
सरकार और चुनाव आयोग को फटकार
खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और चुनाव आयोग के रवैये पर नाराजगी जाहिर की. अदालत ने कहा कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में हुई देरी को चुनाव टालने का आधार नहीं बनाया जा सकता. कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के राहुल रमेश वाघ और सुरेश महाजन मामलों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबा नहीं खींचा जा सकता.
कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि पंचायत और निकाय चुनाव कराने में किसी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं होगी. अदालत ने यह भी कहा कि आयोग का ढीला रवैया लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा नहीं बन सकता.
नवंबर में चुनाव करवाने की दलील खारिज
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से नवंबर में चुनाव करवाने की बात कही गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इस दलील को ठोस आधार के बिना दिया गया तर्क बताया. कोर्ट ने कहा कि राजस्थान जैसे राज्य में बारिश और गर्मी को चुनाव टालने का कारण नहीं माना जा सकता.
खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रदेश में ऐसी कोई असामान्य मौसमीय स्थिति नहीं है, जिसे नागरिक सहन न कर सकें. इसलिए चुनाव समय पर कराना राज्य सरकार और चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है.
पहले भी जारी हो चुके थे आदेश
दरअसल, हाईकोर्ट ने इससे पहले 14 नवंबर को 439 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे. साथ ही 31 दिसंबर तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया था.
बाद में इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी कई याचिकाएं दायर हुईं, जहां से भी राज्य में तय समयसीमा के भीतर चुनाव कराने की बात कही गई थी.
सरकार पर चुनाव टालने के आरोप
याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता प्रेमचंद देवंदा ने अदालत में आरोप लगाया कि राज्य सरकार राजनीतिक कारणों से चुनाव टालना चाहती है. उनका कहना था कि जानबूझकर परिसीमन और अन्य प्रक्रियाओं में देरी की जा रही है ताकि पंचायत और निकाय चुनाव आगे बढ़ाए जा सकें.
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