पहली बार जयपुर में सेना दिवस, 1000 स्वदेशी ड्रोन बने आकर्षण
जयपुर, सीकर। 78वें सेना दिवस के अवसर पर भारतीय थल सेना की दक्षिण पश्चिमी कमान (सप्त शक्ति कमान) द्वारा सवाई मानसिंह स्टेडियम, जयपुर में भव्य शौर्य संध्या का आयोजन किया गया। यह आयोजन इसलिए भी ऐतिहासिक रहा क्योंकि पहली बार राजस्थान में और पहली बार छावनी क्षेत्र के बाहर सेना दिवस मनाया गया।
1947 से ऑपरेशन सिंदूर तक युद्धगाथा का जीवंत चित्रण
शौर्य संध्या में वर्ष 1947 के भारत-पाक युद्ध से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक भारतीय सेना के पराक्रम, बलिदान और विजय गाथा को नाट्य, दृश्य और तकनीकी प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया।
कश्मीर में कबायली हमले, 1965 व 1971 युद्ध, कारगिल, पुलवामा आतंकी हमला और उसके बाद की सर्जिकल स्ट्राइक व ऑपरेशन सिंदूर ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
राजस्थान वीरों की भूमि: आर्मी कमांडर
इस अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह, आर्मी कमांडर दक्षिण पश्चिमी कमान ने कहा
“राजस्थान वीरता और शौर्य की धरती है। इस भूमि ने महाराणा प्रताप, महाराणा सांगा, परमवीर चक्र विजेता पीरु सिंह और शैतान सिंह जैसे महान योद्धा दिए हैं।”
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर पहली बार राजस्थान में सेना दिवस मनाया जा रहा है। इसके तहत ऑनर कैंप, साइकिल रैली, मेगा मेडिकल कैंप और ‘नो योर आर्मी’ प्रदर्शनी जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
1000 स्वदेशी ड्रोन बने शौर्य संध्या का आकर्षण
कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण रहा 1000 स्वदेशी ड्रोन शो।
ड्रोन के माध्यम से आकाश में
- भगवान कृष्ण के रथ पर अर्जुन
- महाराणा प्रताप
- छत्रपति शिवाजी महाराज
- तिरंगा और सेना के प्रतीक चिन्ह
का अद्भुत दृश्य उकेरा गया। इसने आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और विकसित भारत–2047 की भावना को मजबूती से प्रस्तुत किया।
आधुनिक युद्ध नीति और आतंकवाद के खिलाफ संदेश
ड्रोन शो और प्रस्तुतियों में यह संदेश स्पष्ट था कि भारत आधुनिक युद्ध तकनीक, सैन्य नवाचार और आतंकवाद के खिलाफ कठोर नीति के साथ पूरी तरह सक्षम है।
लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने बताया कि इन्हीं स्वदेशी तकनीकों की बदौलत ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने मात्र 88 घंटों में दुश्मन को घुटने टेकने पर मजबूर किया।
परंपरा और शक्ति का अद्भुत संगम
शौर्य संध्या में
- मलखंभ
- कलारिपयट्टू
- शत्रुजीत ब्रिगेड द्वारा पैरा मोटर्स का रोमांचक प्रदर्शन
ने कार्यक्रम को और भी यादगार बना दिया।
सेना दिवस का ऐतिहासिक महत्व
फील्ड मार्शल के. एम. करियप्पा ने 15 जनवरी 1949 को स्वतंत्र भारत के पहले सेनाध्यक्ष का पदभार संभाला था। इसी स्मृति में हर वर्ष 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाता है, जो वीर जवानों के साहस, अनुशासन और बलिदान को नमन करने का प्रतीक है।
जयपुर में पहली बार, छावनी से बाहर आयोजन
देश में पहले सेना दिवस केवल नई दिल्ली छावनी में मनाया जाता था।
प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर—
- 2023: बेंगलुरु
- 2024: लखनऊ
- 2025: पुणे
और 2026 में पहली बार छावनी क्षेत्र से बाहर जयपुर में आयोजन हुआ, जिससे आमजन की भागीदारी बढ़ी।
ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम में प्रमुख शासन सचिव नवीन जैन, शासन सचिव नीरज के. पवन, जयपुर कलेक्टर डॉ. जितेंद्र सोनी, सेना के वरिष्ठ अधिकारी, एनसीसी कैडेट्स और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।
