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8th Pay Commission: NPS खत्म करने से लेकर 6% इंक्रीमेंट तक, कर्मचारियों की बड़ी मांगें; राजस्थान पर क्या होगा असर?

In 8th Pay Commission Employees Major Demands and its Impact on Rajasthan?

8वें वेतन आयोग को लेकर देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों के साथ राजस्थान के लाखों सरकारी कर्मचारियों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। न्यूनतम वेतन बढ़ाने, 6% सालाना इंक्रीमेंट, 5 प्रमोशन और NPS खत्म कर पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने जैसी मांगों के बीच अब राजस्थान में भी कर्मचारी संगठन सरकार की तरफ देख रहे हैं।

8 वें वेतन आयोग से लगभग 45 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 69 लाख पेंशनर्स के वेतन, भत्तों और पेंशन में बदलाव की उम्मीद है। इसका असर राजस्थान जैसे राज्यों पर भी पड़ सकता है, जहां पहले ही पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू की जा चुकी है।

राजस्थान में क्यों अहम है 8वां वेतन आयोग?

राजस्थान में बड़ी संख्या में शिक्षक, पुलिसकर्मी, स्वास्थ्य कर्मचारी, पंचायत कर्मचारी और सचिवालय स्टाफ सरकारी वेतन व्यवस्था पर निर्भर हैं। ऐसे में केंद्र सरकार अगर वेतन और पेंशन में बड़ा बदलाव करती है तो राज्य कर्मचारियों की भी समान लाभ की मांग तेज हो सकती है।

राजस्थान में कर्मचारी संगठन पहले से ही DA, प्रमोशन और वेतन विसंगतियों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। अब 8वें वेतन आयोग को लेकर नई उम्मीदें बन रही हैं।

मिनिमम सैलरी और फिटमेंट फैक्टर पर सबसे ज्यादा चर्चा

कर्मचारी संगठनों ने मौजूदा 18,000 रुपये न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 69,000 रुपये करने की मांग रखी है। इसके साथ 3.83 फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव भी दिया गया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य खर्चों को देखते हुए मौजूदा वेतन ढांचा पर्याप्त नहीं है। अगर केंद्र सरकार इस पर फैसला लेती है तो राजस्थान के कर्मचारियों में भी नई वेतन संरचना को लेकर मांग बढ़ सकती है।

6% सालाना इंक्रीमेंट और 5 प्रमोशन की मांग

मेमोरेंडम में कर्मचारियों ने कई बड़े बदलावों की मांग रखी है:

  • बेसिक पे पर 6% सालाना इंक्रीमेंट
  • 30 साल की नौकरी में 5 प्रमोशन
  • प्रमोशन में देरी होने पर ACP का लाभ
  • प्रमोशन पर दो अतिरिक्त इंक्रीमेंट

राजस्थान में भी लंबे समय से कर्मचारियों द्वारा समय पर प्रमोशन और वेतन बढ़ोतरी की मांग उठाई जाती रही है।

NPS हटाने की मांग फिर चर्चा में

सबसे अहम मांग नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को हटाने और पुरानी पेंशन योजना को पूरी तरह लागू करने की है। राजस्थान पहले ही OPS लागू कर चुका है। ऐसे में राज्य के कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि केंद्र भी पुरानी पेंशन व्यवस्था पर फैसला ले। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पेंशन सामाजिक सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार है।

अलाउंस और छुट्टियों में भी बदलाव की मांग

मेमोरेंडम में HRA, CEA और रिस्क अलाउंस सहित सभी भत्तों को तीन गुना बढ़ाने की मांग की गई है।

इसके अलावा:

  • बिना ब्याज फेस्टिवल एडवांस
  • वाहन ऋण
  • 600 दिन तक लीव एनकैशमेंट
  • पैटरनिटी लीव
  • मेंस्ट्रुअल लीव
  • पैरेंट केयर लीव

जैसी सुविधाओं की मांग भी रखी गई है।

राजस्थान सरकार पर बढ़ सकता है वित्तीय दबाव

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर केंद्र की तर्ज पर राज्यों में भी वेतन और पेंशन बढ़ोतरी लागू होती है तो राजस्थान सरकार पर बड़ा वित्तीय दबाव पड़ सकता है।

OPS पहले से लागू होने के कारण राज्य पर पेंशन भार बढ़ने की चर्चा पहले से होती रही है। ऐसे में 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें राज्य के बजट पर भी असर डाल सकती हैं।

डिस्क्लेमर: इस स्टोरी में बताई गई कर्मचारियों की उम्मीदें और मांगें अलग-अलग स्टाफ और पेंशनर एसोसिएशन, पब्लिक डिस्कशन और पिछले पे कमीशन ट्रेंड्स पर आधारित हैं, 8वें वेतन आयोग की आखिरी सिफारिशें और सरकार के फैसले अलग हो सकते हैं।

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