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Rajasthan : राजस्थान में अब ये पंच-सरपंच दोबारा नहीं लड़ सकेंगें चुनाव! जानें- क्या है कारण

पंच-सरपंचों के दोबारा चुनाव लड़ने पर रोक लग सकती है। राज्य चुनाव आयोग ऐसे प्रत्याशियों की सूची मंगाने के लिए जल्द ही जिला कलेक्टरों के दिशा-निर्देश जारी कर सकता है।
 
राजस्थान में अब ये पंच-सरपंच दोबारा नहीं लड़ सकेंगें चुनाव!

Rajasthan News : राजस्थान से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है।  बता दे की पंच सरपंच के चुनाव को लेकर प्रदेश में तैयारियां अब जोरों शोरों पर चलने लगी है।  लेकिन उस से पहले बता दे की कई पंच और सरपंच के चुनाव पर अब तलवार लटक गई है।  जानकारी के मुताबिक पिछले पंचायत चुनाव में खर्चे का ब्योरा नहीं देने वाले पंच-सरपंचों के दोबारा चुनाव लड़ने पर रोक लग सकती है। राज्य चुनाव आयोग ऐसे प्रत्याशियों की सूची मंगाने के लिए जल्द ही जिला कलेक्टरों के दिशा-निर्देश जारी कर सकता है।


3 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक


अधिक जानकारी के लिए बता दे कि आयोग के नियमों के अनुसार, चुनाव लड़ने वाले सभी प्रत्याशियों को खर्च का विवरण देना अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने पर 3 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जा सकती है।


राजस्थान में कब होंगें पंचायती राज चुनाव


प्रदेश में मार्च-अप्रैल में पंचायती राज चुनाव प्रस्तावित हैं। हाल ही में आयोग ने चुनावी खर्च सीमा बढ़ाई भी थी।



जिला कलेक्टर्स को जारी हो सकते हैं निर्देश


मिली जानकारी के मुताबिक साल 2020 में 21 जिलों की 636 जिला परिषद सदस्यों व 4371 पंचायत समिति सदस्यों के लिए चुनाव कराए गए थे। पंचायत समिति सदस्य के लिए 12,663 व जिला परिषद सदस्य के लिए 1778 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था। राज्य चुनाव आयोग के सूत्र बताते हैं कि उस चुनाव में जिन प्रत्याशियों ने रिजल्ट आने के बाद खर्च का ब्योरा नहीं दिया है, उनकी लिस्ट तैयार की जाएगी।Rajasthan News


जानिए क्या कहता है नियम 


नियमानुसार जिला परिषद, पंचायत समिति सदस्य, मुखिया, सरपंच, पंच और वार्ड सदस्य पद के लिए चुनाव लड़ने वाले हर प्रत्याशियों को रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर अपने खर्च का विवरण आयोग को देना होता है। अनुमान है कि हजारों प्रत्याशियों ने यह ब्योरा नहीं दिया था।Rajasthan News


जल्द जारी हो सकते है आदेश 


अब आयोग जिला निर्वाचन अधिकारियों को जल्द ही ऐसे प्रत्याशियों की लिस्ट तैयार करने के लिए आदेश जारी कर सकता है। जिला निर्वाचन अधिकारी यह लिस्ट आयोग को भेजेंगे।

इसके बाद चुनाव आयोग ही यह तय करेगा कि चुनावी खर्च नहीं बताने वालों पर क्या कार्रवाई की जाए। नियमानुसार आयोग 3 साल तक चुनाव लड़ने की पाबंदी लगा सकता है।Rajasthan News