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राजस्थान की हर ग्राम पंचायत में बनेंगे ‘बर्तन बैंक’, शादी-ब्याह में किराए पर लेंगे तो लगेगा इतना चार्ज

राज्य सरकार की अभिनव पहल
सीकर, डीग जिले समेत प्रदेश के गांवों को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए राज्य सरकार पंचायतों में एक अनूठा बैंक खोलने जा रही है। यह बैंक बर्तनों का होगा, जिनका उपयोग गांव में किसी आयोजन या सामुदायिक कार्यक्रमों में किया जाएगा। इसका किराया भी मात्र 3 रुपए प्रति बर्तन सेट रखा गया है। राज्य सरकार की ओर से प्रदेश की लगभग 1000 से ज्यादा पंचायतों में बर्तन बैंक बनाने की घोषणा बजट में ही की जा चुकी है, लेकिन अब इसकी गाइड लाइन भी जारी कर दी गई है।

पहले चरण में प्रदेश के एक हजार गांवों सहित भरतपुर के 21 और डीग जिले के 15 पंचायतों में बर्तन बैंक बनाए जाएंगे और इसके लिए इन पंचायतों को एक-एक लाख रुपए की राशि दी जाएगी। राज्य सरकार ने इस बार के बजट में पंचायतों को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए बर्तन बैंक बनाने की घोषणा की थी। इसे पूरा करते हुए पंचायत राज विभाग के शासन सचिव डॉ. जोगाराम ने बर्तन बैंक की गाइड लाइंस जारी कर दी हैं।

शादी-ब्याह में हो सकेगा बर्तनों का उपयोग:

इन बर्तनों का उपयोग गांव में शादी-ब्याह या किसी परिवार के आयोजनों या सामुदायिक कार्यक्रमों या पंचायत स्तर पर होने वाले प्रशिक्षणों में किया जाएगा, ताकि ऐसे कार्यक्रमों में प्लास्टिक की पत्तलों के उपयोग को रोका जा सके और गांवों को प्लास्टिक मुक्त बनाया जा सके।

एक सेट में होंगे ये बर्तन:

गाइड लाइन के अनुसार, एक सेट में एक थाली, तीन कटोरी, एक चम्मच और एक गिलास होगा। हर पंचायत में न्यूनतम चार सौ ऐसे सेट खरीदे जाएंगे। हर बर्तन पर संबंधित पंचायत का नाम और स्वच्छ भारत मिशन छपवाया जाएगा। बर्तन पांच वर्ष बाद बदले जा सकेंगे, जो बर्तन अच्छी स्थिति में होंगे, उन्हें आगे भी काम में लाया जा सकेगा। बर्तनों की न्यूनतम संख्या बनाए रखने के लिए पंचायत समय-समय पर बर्तन खरीदेगी। बर्तन किराए पर देने के लिए तीन रुपए प्रति सेट किराया निर्धारित किया गया है। यह राशि बर्तन बैंक में ही जमा होगी और इसकी सार संभाल आदि में खर्च की जाएगी। दिव्यांग, बीपीएल, अनुसूचित जाति, जनजाति और विशेष परिस्थितियों में किराए में पचास प्रतिशत की छूट दी जा सकेगी। बर्तन खोने और टूट-फूट होने पर संबंधित उपयोगकर्ता से किराए और शुल्क सहित इसकी भरपाई कराई जाएगी।

महिला स्वयं सहायता समूह करेगा संचालन:

बर्तन बैंक का संचालन राजीविका की ओर से संचालित महिला स्वयं सहायता समूह की ओर से किया जाएगा। यह समूह ही बर्तनों की सार संभाल, रेकॉर्ड का मेंटेनेंस और इसे लोगों को देने और जमा करने का काम करेगा। महिला स्वयं सहायता समूह का चयन जिला परिषद के मुय कार्यकरी अधिकारी की समिति करेगी। राज्य सरकार ने बजट में पंचायतों को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए बर्तन बैंक की घोषणा की थी। जिसकी गाइड लाइन जारी कर दी गई है। जल्द ही जिले की 15 पंचायतों में बर्तन बैंकों की स्थापना की जाएगी। बर्तन बैंक का संचालन महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा किया जाएगा।

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