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राजस्थान के स्कूलों की हालत पर लोकसभा में उठी आवाज: सांसद राहुल कस्वां ने बताया जर्जर ढांचा, खर्च नहीं हो रहा बजट

समग्र शिक्षा अभियान के फंड उपयोग पर सवाल, स्कूलों में 83 हजार कमरे अनुपयोगी

Voice Raised in Lok Sabha Over the Condition of Rajasthan's Schools

लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान चूरू सांसद राहुल कस्वां ने राजस्थान के सरकारी स्कूलों की खराब स्थिति का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने सदन में कहा कि प्रदेश के स्कूलों में बुनियादी ढांचा बेहद खराब है, जबकि समग्र शिक्षा अभियान (समसा) के तहत मिलने वाला बजट भी पूरी तरह खर्च नहीं किया जा रहा है।

83 हजार कमरे बैठने लायक नहीं, 2.5 लाख जर्जर

सांसद कस्वां ने बताया कि राजस्थान में करीब 83 हजार स्कूल कमरे ऐसे हैं जो बैठने लायक नहीं हैं, जबकि करीब 2.5 लाख कमरों की हालत जर्जर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और इससे छात्रों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है।

समसा का 50% बजट भी खर्च नहीं कर पाई सरकार

उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से सवाल करते हुए कहा कि राज्य सरकार समग्र शिक्षा अभियान के तहत मिलने वाले फंड का 50 प्रतिशत भी उपयोग नहीं कर पाई है, जबकि इसके लिए हर साल एनुअल वर्क प्लान तैयार किया जाना अनिवार्य है।

सांसद ने यह भी मांग की कि स्टेट और डिस्ट्रिक्ट एक्शन प्लान कमेटियों में सांसदों को शामिल किया जाए, ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने दिया जवाब

इस पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार स्कूली इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए समसा के बजट आवंटन में वृद्धि करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

झालावाड़ हादसे के बाद बढ़ी चिंता

सांसद कस्वां ने कहा कि झालावाड़ स्कूल हादसे में बच्चों की मौत के बाद से स्कूलों के जर्जर कमरों की स्थिति और भी गंभीर रूप से सामने आई है। उन्होंने बताया कि केवल चूरू संसदीय क्षेत्र में ही 6000 से अधिक कमरे जर्जर हैं, जबकि करीब 1900 नए कमरों की तत्काल जरूरत है

प्रस्ताव लंबित, योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा

उन्होंने आरोप लगाया कि समसा, PM-STARS और नाबार्ड जैसी योजनाओं के तहत स्कूलों में नए कमरों के निर्माण का प्रावधान है, लेकिन राज्य सरकार समय पर प्रस्ताव तक नहीं भेज पा रही है। यहां तक कि दो साल पहले भेजे गए मरम्मत के प्रस्ताव भी अभी तक स्वीकृत नहीं हुए हैं।