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खाटूश्यामजी में 376वां सूरजगढ़ का निशान चढ़ाया

पूजा-अर्चना के बाद लक्खी मेले का हुआ समापन

दांतारामगढ़ (लिखा सिंह सैनी )। विश्व प्रसिद्ध खाटूश्यामजी मंदिर के गुम्बद पर सूरजगढ़ का निशान चढ़ाने के साथ ही मेला संपन्न हो गया। निशान को 35 साल से सूरजगढ़ के कलाकार हेतराम राजोरिया ही तैयार कर रहे है। निशान पर बाबा श्याम की पेंटिंग भी होती है, जिसे बनाने में 2 दिन का समय लगता है।
सूरजगढ़ का निशान चढ़ने के साथ ही मंदिर कमेटी ने मेले के समापन का औपचारिक ऐलान कर दिया। श्रीश्याम मंदिर कमेटी के अनुसार 10 दिन तक चले फाल्गुनी लक्खी मेले में करीब 35 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा श्याम के दर्शन किए हैं।
बुधवार को एकादशी पर खाटू धाम में लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। बाबा श्याम के जन्मोत्सव पर बुधवार को श्याम रथ में नीले घोड़े पर सवार होकर श्याम बाबा नगर भ्रमण पर निकले। इस दौरान श्याम भक्तों को बाबा श्याम को खजाना भी लुटाया गया।

35 साल से तैयार कर रहे निशान

कलाकार हेतराम राजोरिया ने बताया कि वे पिछले 35 साल से बाबा श्याम का निशान तैयार कर रहे हैं। निशान की सिलाई 5 दिन में टेलर राजकुमार ने की। जिसके बाद 2 दिन का समय निशान पर बाबा श्याम की पेंटिंग बनाने में लगता है। पेंटर महेंद्र राजोरिया निशान पर नीले घोड़े पर बैठे बाबा श्याम की पेंटिंग बनाते है। जिस जगह का निशान चढ़ाया जाना है, उस जगह का नाम और पदयात्रा का नाम भी निशान पर लिखा जाता है।

13 फीट लम्बा 9 फीट चौड़ा है निशान

बाबा को चढ़ाए जाने वाले निशान की लंबाई 13 फीट व चौड़ाई 9 फिट है। यह निशान फाल्गुन शुक्ल पक्ष द्वादशी को चढ़ाया जाता है। इस सफेद निशान को तैयार करने में करीब एक सप्ताह का समय लगता है। निशान को तैयार करने के लिए 11 मीटर सफेद कपड़े के साथ लाल व पीले रंग का कपड़ा भी काम में आता है। इस निशान के निर्माण और पदयात्रा की जिम्मेदारी के लिए श्याम भक्तों का नाम 2 साल पहले ही तय हो जाता है।

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