फिजूलखर्ची के खिलाफ युवा प्रोफेसर की अनोखी जिद, पूरे क्षेत्र में चर्चा
फतेहपुर (सीकर)। आज के दौर में जहां शादियां दिखावे और धूमधाम का प्रतीक बनती जा रही हैं, वहीं फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र के गांव भोजदेश्वर निवासी युवा प्रोफेसर आदित्य चौधरी ने सादगी की ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी पूरे शेखावाटी में चर्चा हो रही है।
दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत आदित्य की शादी 21 फरवरी को थी। आमतौर पर लोग सैकड़ों बारातियों और गाड़ियों के काफिले की उम्मीद कर रहे थे।
लेकिन जब बारात पहुंची, तो नजारा बिल्कुल अलग था।
सिर्फ 11 युवा और दो छोटी गाड़ियां
आदित्य सिर्फ 11 युवा रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ दो छोटी गाड़ियों में दुल्हन लेने पहुंचे।
ना डीजे,
ना पटाखों का शोर,
ना लंबा काफिला।
शादी समारोह बीकानेर रोड स्थित होटल मयूर में आयोजित हुआ, जहां सभी रस्में शांतिपूर्ण माहौल में सम्पन्न हुईं।
नानाजी की विरासत से मिली प्रेरणा
आदित्य ने बताया कि उन्हें यह प्रेरणा अपने ननिहाल से मिली।
“मेरे नानाजी और मेरे पिता की शादी में भी सिर्फ 11 लोग ही शामिल हुए थे। फिजूल खर्च कम करना चाहिए, इसलिए हमने भी वही परंपरा निभाई।”
बारात में उनके मामा के बेटे, बुआ के बेटे, मित्र और बहनोई शामिल रहे।
पिता ने दूसरी शादी में किया भोजन
आदित्य के पिता महावीर खीचड़, जो पूर्व भाजपा जिला उपाध्यक्ष भी रहे हैं, बारात में शामिल नहीं हुए।
वे गांव में ही एक अन्य शादी में शामिल हुए और वहीं भोजन किया।
इस दृश्य ने लोगों को भावुक कर दिया। कई लोगों ने कहा—
“ऐसी मिसाल देना आसान नहीं, इसे निभाना बहुत बड़ी बात है।”
दुल्हन पक्ष ने भी अपनाई सादगी
दुल्हन के पिता राजेश नेहरा ने बताया कि शुरुआत में उन्हें 11 लोगों की बारात का विचार थोड़ा अजीब लगा।
“लेकिन जब उनके विचार सुने तो पूरा परिवार इस निर्णय से सहमत हो गया।”
शादी की सभी रस्में बेहद सादगी और शांतिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुईं।
समाज को क्या मिला संदेश?
- शादी में दिखावे से ज्यादा संस्कार जरूरी हैं
- फिजूलखर्ची से बचकर समाज को सही दिशा दी जा सकती है
- परंपरा और आधुनिक सोच का सुंदर मेल संभव है
आज जब शादियों में लाखों-करोड़ों का खर्च आम बात हो गई है, ऐसे में फतेहपुर के इस युवा प्रोफेसर ने सादगी की नई मिसाल कायम की है।
