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गौवंश के ग्रीष्म ऋतु एवं लू प्रकोप से बचाव के लिए एडवाईजरी

सीकर, संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग सीकर डॉ. दीपक कुमार ने बताया कि गौवंश गर्मी में बढे हुये तापमान के लिये अत्यधिक संवेदनशील होता है एवं आसानी से तापघात का शिकार हो जाता है। गर्मी के मौसम में जब बाहरी वातावरण का तापमान बहुत अधिक हो जाता है तो ऐसी स्थिति में पशु को ज्यादा तापमान पर ज्यादा देर तक रखने या गर्म हवा के झोकों के सम्पर्क में आने पर लू लगने का डर ज्यादा हो जाता है, इसे हीट स्ट्रोक या रान स्ट्रोक कहते है।

गौवंश में तापधात के मुख्य लक्षण :-

तीव्र ज्वर की स्थिति, मुंह खोलकर जोर-जोर से सांस लेना अर्थात हांफना,
मुंह से लार गिरना, गौवंश की कार्यशीलता कम हो जाना, बैचेनी की स्थिति होना, भूख में कमी एवं पानी अधिक पीना, पेशाब कम होना अथवा बन्द हो जाना।धड़कन तेज होना, कभी-कभी आफरे की शिकायत होना ।

तापघात से बचने के उपाय :

गौवंश को सुर्य की सीधी किरणों से दूर रखें, धूप और लू से बचाव के लिये हवादार छप्पर या छायादार वृक्ष के नीचे रखे, गौवंश गृह को ठण्डा रखने के लिये दिवारों के उपर जूट की टाट लटकाकर उस पर थोडी-थोडी देर में पानी का छिड़काव करना चाहिए ताकि बाहर से आने वाली हवा में ठंडक बनी रहें,
पंखे या कुलर का यथा संभव उपयोग करें, गौवंश में पानी, लवण की कमी होने वाले भोजन में अरूची होने के मध्यनजर दिन में कम से कम चार बार स्वच्छ एवं ठंडा जल गौवंश को उपलब्ध कराना चाहिये। साथ ही संतुलित आहार के साथ-साथ उचित मात्रा में खनिज मिश्रण भी देना चाहिये। उच्च गुणवता का आंसानी से पचनीय चारा गौवंश को उपलब्ध कराया जाना चाहिये।
गौवंश को चराई के लिये सुबह जल्दी और शाम को देर से भेजना चाहिये। ताकि अत्यधिक बढे हुये तापमान से गौवंश को बचाया जा सके।
आहार में संतुलन के लिए एजौला घास का प्रयोग किया जा सकता है। साथ ही आहार में गेहूं का चौकर और जौ की मात्रा बढ़ा देनी चाहिये।
गौवंश का परिवहन एवं अन्य संबंधित गतिविधियां सुबह या शाम के ठंडे वातावरण में की जानी चाहिये।

गौवंश में तापघात के उपचार :

गौवंश को सुबह या शाम के समय नहलायें या उसके पूरे शरीर पर ठंडे पानी का छिड़काव करना चाहियें।

गौवंश के शरीर में पानी में लवणों की कमी को पूरा करने के लिये इलेक्ट्रोलाईट थेरेपी देनी चाहिये।

गौवंश चारा खाना बन्द करे या सुस्त बीमार दिखाई देवे तो बिना किसी देरी किये निकटत्तम पशु चिकित्सालय से संपर्क स्थापित कर परामर्श या पर्याप्त उपचार प्राप्त करे।

ग्याभन एवं असहाय गौवंश की विशेष देखभाल करनी चाहिये एवं आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सालय उपचार की व्यवसथा की जावें।

जागरूकता :

आमजन द्वारा स्वंय के घर के आगे पानी की खेल बनाई जाकर स्वच्छ पानी गोवंश के लिए उपलब्ध कराया जावे।

मृत गौवंश के शव का निस्तारण यथा शीध्र एवं सम्मानजनक ढंग से किया जावे, जिसे गर्मी के कारण शव का विघटन नहीं हो पाये और बिमारी का खतरा उत्पन्न ना हो।
किसी भी गोवंश में तापघात के लक्षण दिखाई देने पर तुरन्त नजदीकी पशुचिकित्सालय में सूचना देवे।

उचित स्थान पर चुग्गा पात्र एवं परिण्डे की व्यवस्था के लिए सहयोग प्रदान करे, जिससे गर्मियों के मौसम में पक्षियों को पानी की समस्या नही होगी एवं पशु पक्षियों को चुग्गा एवं स्वच्छ पीने योग्य पानी मिल सकेगा।

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