सीकर। 16वीं विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को बाजोर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान को निरस्त करने का मामला सदन में गूंजा।
राजेन्द्र पारीक ने इस संबंध में राजस्थान सरकार के शिक्षा मंत्री से प्रश्न पूछा। मंत्री द्वारा दिए गए जवाब को विपक्ष ने असंतोषजनक बताते हुए इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की।
विधानसभा में उठा मामला
विधायक पारीक द्वारा खेल मैदान निरस्त करने के निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि यह बच्चों के भविष्य और गांव के विकास से जुड़ा विषय है।
विपक्ष का आरोप था कि सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने में असफल रही।
अम्बेडकर भवन में विधायक का आभार
सदन में मुद्दा मजबूती से उठाने पर गांव के वरिष्ठजनों ने अम्बेडकर भवन बाजोर में बैठक आयोजित कर विधायक का धन्यवाद ज्ञापित किया।
बैठक को संबोधित करते हुए अशोक कुमार वर्मा ने कहा कि खेल मैदान को निरस्त करना गांव के विकास और बच्चों के भविष्य के साथ कुठाराघात है।
ग्रामीणों ने जताया विरोध
बाजोर फाउंडेशन की संरक्षक चम्पा बाजोर ने कहा कि खेल गतिविधियां बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। बिना विचार के मैदान निरस्त करना निंदनीय है।
गांव की प्रशासक सरपंच संगीता हंसराज लूणा ने कहा कि खेल मैदान गांव का अधिकार है और इसके लिए संघर्ष जारी रहेगा।
अशोक मीणा ने आरोप लगाया कि सरकार गांव के विकास की अनदेखी कर एक व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रही है।
मोहन बाजोर ने उपयोगितावाद के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार को अधिकतम लोगों के अधिकतम हित को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए।
भागीरथ सिंह शेखावत ने सरकार पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया।
बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे उपस्थित
बैठक में नंदलाल लूणा, कन्हैयालाल ढाका, प्रशांत लूणा, महेश लूणा, हनुमान मेहरा, ओमप्रकाश जीवाका, ईश्वर मेहरा, गुरूदयाल, रामदेव बाकोलिया, सुमन वर्मा, मुकेश चाहिल सहित सैकड़ों महिलाएं और गणमान्यजन मौजूद रहे।
