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मुख्यमंत्री ने दांतारामगढ़ के दीपचंद शर्मा को लोकतंत्र सेनानी सम्मान से विभूषित किया

दांतारामगढ़।देश की भावी पीढ़ी को देश के लिए बलिदान देने की प्रेरणा देने के लिए दिया जाता है लोकतंत्र सेनानी सम्मान

जयपुर/दांता रामगढ़, [लिखा सिंह सैनी ] राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मुख्यमंत्री निवास में बुलाकर गीता मनीषी दीपचंद्र शर्मा को ताम्रपत्र भेंट करके लोकतंत्र सेनानी सम्मान 2024 से विभूषित किया। यह एक प्रकार से सर्वोच्च सम्मान है‌। भारत रत्न भारत सरकार का एवं राजस्थान रत्न राजस्थान सरकार का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है।परंतु सम्मान राशि की दृष्टि से देखें तो स्वतंत्रता सेनानी एवं लोकतंत्र सेनानी से बढ़कर कोई सम्मान नहीं है। राजस्थान सरकार स्वतंत्रता सेनानियों को पचपन हजार रुपए मासिक सम्मान राशि देती है एवं भारत सरकार तीस हजार+ मंहगाई भत्ता सम्मान राशि देती है। इस प्रकार राजस्थान में स्वतंत्रता सेनानियों को एक लाख रुपए से अधिक सम्मान राशि हर महीने मिलती है जबकि राजस्थान रत्न को एक लाख रुपए सम्मान राशि जीवन भर के लिए मिलती है। इस प्रकार देखा जाए तो स्वतंत्रता सेनानी एवं लोकतंत्र सेनानी का सम्मान ही सबसे बड़ा सम्मान है।

स्वतंत्रता के लिए, लोकतंत्र की रक्षा के लिए सर्वश्रेष्ठ बलिदान की भावना से जेल की यातना सहने वालों के सम्मान की कोई कीमत नहीं होती है। परन्तु लोकतंत्र सेनानियों के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट, राजस्थान हाईकोर्ट एवं अन्य हाईकोर्टों ने कहा कि ये प्रेरणा पुरुष हैं। इन्हें सम्मानित करना सरकार का कर्तव्य है। जीवन की कीमत पर लोकतंत्र की रक्षा के लिए जेल की यातना सहने वाले लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित नहीं करेंगे तो देश की भावी पीढ़ी को यह प्रेरणा कैसे मिलेगी कि वे उस समय देश के लिए सर्वस्व बलिदान कर दें जब देश को इसकी जरूरत हो।

मुख्यमंत्री ने अपने हस्ताक्षर से प्रदत्त ताम्रपत्र के प्रशस्ति पत्र में लिखा है कि श्री दीपचंद शर्मा ! आपके अदम्य साहस ,त्याग और बलिदान ने आपातकाल के दौरान हमारे देश के लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आपके दृढ़ संकल्प और अटूट भावना ने अंधकारमय समय में भी आशा के किरण जगाई। आपके साहस और बलिदान के लिए हम आपको सम्मानित करते हुए आपके प्रति कृतज्ञ हैं।

गीता मनीषी लोकतंत्र सेनानी दीपचंद्र शर्मा बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। धार्मिक दृष्टि से इनका परिवार अद्वितीय है। इन्हें एवं इनके सभी पुत्र पुत्रियों को श्रीमद्भगवद्गीता कंठस्थ है। इन्होंने एक हजार से अधिक स्कूल कालेज गुरुकुल आदि संस्थाओं में प्रेरणा दायक व्याख्यान देते हुए लाखों लोगों को गीता के श्लोक कंठस्थ करवाये हैं। ये आर एस एस के प्रचारक एवं विद्याभारती के विद्यालय में आदर्श प्रिंसिपल के रूप में कार्य किया है।इन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अनेक ऐसे प्रयोग किये हैं,जिनका लाभ देश के सभी विद्यालयों को मिल रहा है।सत्य की राह पर चलने के कारण इनका पूरा जीवन संघर्षमय रहा है। आर टी आई कार्यकर्ता के रूप में इन्होंने सरकार को नये कानून बनाने के लिए भी बाध्य किया है।

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