सीकर जिले में बाल विवाह के खिलाफ बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई सामने आई है।
दो नाबालिग बच्चियों के प्रस्तावित विवाह को न केवल रोका गया, बल्कि न्यायालय से निषेधाज्ञा जारी कर कानूनी रूप से प्रतिबंधित भी कर दिया गया।
श्रीमाधोपुर में मिली सूचना, टीम पहुंची मौके पर
मामला श्रीमाधोपुर तहसील के नांगल भी क्षेत्र का है, जहां दो बच्चियों के बाल विवाह की सूचना मिली।
सूचना की पुष्टि होते ही जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन एलायंस, गायत्री सेवा संस्थान, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची।
जांच में सामने आई उम्र और पढ़ाई
जांच में पता चला कि दोनों बच्चियां स्कूल में पढ़ती हैं और हाल ही में 10वीं की परीक्षा दी है।
- एक बच्ची की उम्र 17 वर्ष
- दूसरी की उम्र 15 वर्ष
टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए परिजनों को नोटिस देकर विवाह नहीं करने के लिए पाबंद किया।
आदेश की अवहेलना पर कोर्ट पहुंचा मामला
इसके बावजूद 19 अप्रैल को फिर सूचना मिली कि शादी की तैयारियां जारी हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और बाल अधिकारिता विभाग ने न्यायालय में आवेदन किया।
न्यायालय ने जारी की निषेधाज्ञा
श्रीमाधोपुर न्यायालय ने बाल विवाह के खिलाफ निषेधाज्ञा आदेश जारी किया, जिससे प्रस्तावित विवाह पूरी तरह कानूनी रूप से रुक गया।
यह आदेश जिले में पहली बार जारी हुई निषेधाज्ञा है, जो भविष्य में मिसाल बनेगा।
अधिकारियों और टीम की अहम भूमिका
इस कार्रवाई में कई विभागों और संगठनों की सक्रिय भागीदारी रही, जिनमें:
- डॉ. शालिनी गोयल (जिला विधिक सेवा प्राधिकरण)
- डॉ. गार्गी शर्मा (बाल अधिकारिता विभाग)
- नरेश कुमार सैनी, अभिषेक बगड़िया
- चाइल्ड हेल्पलाइन व पुलिस टीम
विशेषज्ञों ने बताया अहम कदम
बाल अधिकार विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र पांड्या ने कहा:
“यह आदेश बाल विवाह के खिलाफ सख्त कानूनी संदेश देता है कि अब ऐसे अपराधों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
वहीं, डॉ. शालिनी गोयल ने कहा:
“शिक्षा नगरी सीकर में ऐसी कुरीति चिंताजनक है, शिक्षा ही इसका समाधान है।”
प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिले तो तुरंत जानकारी दें:
राष्ट्रीय कानूनी सहायता हेल्पलाइन: 15100
चाइल्ड हेल्पलाइन: 1098
सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।



