ऑनर किलिंग और धोखाधड़ी के मामलों को देखते हुए उठी मांग
सीकर में बाजोर फाउंडेशन ने राजस्थान सरकार से कोर्ट मैरिज को लेकर महत्वपूर्ण मांग उठाई है।
फाउंडेशन ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को ज्ञापन भेजकर कोर्ट मैरिज में माता-पिता या अभिभावकों की सहमति अनिवार्य करने के लिए कानून बनाने की मांग की है।
ऑनर किलिंग के बढ़ते मामलों पर चिंता
फाउंडेशन की संरक्षक चम्पा बाजोर ने कहा कि राजस्थान में ऑनर किलिंग के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जो समाज के लिए चिंता का विषय है।
उन्होंने बताया कि खासकर शेखावाटी क्षेत्र में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें कम उम्र की लड़कियों को बहला-फुसलाकर या धोखे में रखकर कोर्ट मैरिज करा दी जाती है।
परिवारों को झेलना पड़ता है मानसिक आघात
चम्पा बाजोर के अनुसार, इस तरह की घटनाओं से परिवारों को गहरा मानसिक आघात पहुंचता है।
कई बार यह स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि दुखद घटनाएं भी सामने आ जाती हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि विवाह पंजीकरण से एक माह पहले माता-पिता और परिवारजनों को सूचना देना अनिवार्य किया जाए।
गुजरात मॉडल लागू करने की मांग
फाउंडेशन के संस्थापक मोहन बाजोर ने कहा कि युवाओं को विवाह करने की संवैधानिक स्वतंत्रता है, लेकिन यह स्वतंत्रता धोखाधड़ी या सामाजिक हिंसा का कारण नहीं बननी चाहिए।
उन्होंने राजस्थान सरकार से मांग की कि गुजरात सरकार की तर्ज पर कानून बनाकर विवाह पंजीकरण से पहले माता-पिता या अभिभावकों को सूचना और सहमति अनिवार्य की जाए।
सामाजिक बुराइयों पर लग सकती है रोक
बाजोर फाउंडेशन का मानना है कि यदि ऐसा कानून लागू किया जाता है तो—
- कम उम्र की लड़कियों के साथ धोखाधड़ी से विवाह
- ऑनर किलिंग जैसी घटनाएं
काफी हद तक कम की जा सकती हैं।
