सीकर जिले में राज्य सरकार की नई पहल के तहत कस्टम हायरिंग केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।
इन केंद्रों के जरिए किसान ट्रैक्टर, थ्रेसर, रोटावेटर, रीपर, सीड ड्रिल जैसे आधुनिक कृषि यंत्र किराए पर ले सकेंगे।
छोटे किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा
यह योजना खासतौर पर लघु और सीमांत किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी।
जिन किसानों के पास महंगे उपकरण खरीदने के संसाधन नहीं हैं, वे अब आसानी से इनका उपयोग कर सकेंगे।
इससे:
- खेती की लागत घटेगी
- उत्पादन बढ़ेगा
- किसानों की आय में सुधार होगा
आधुनिक तकनीक से बढ़ेगी कार्यक्षमता
कस्टम हायरिंग केंद्रों के जरिए किसान कम समय में ज्यादा काम कर पाएंगे।
बुवाई, कटाई और थ्रेसिंग जैसे कार्य अब अधिक कुशल और तेज होंगे।
500 केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य
राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 500 कस्टम हायरिंग केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।
यह योजना सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन के तहत संचालित की जा रही है।
अनुदान और सहायता की जानकारी
इस योजना के तहत:
30 लाख रुपए की परियोजना लागत
अधिकतम 24 लाख रुपए तक अनुदान (संस्थाओं के लिए)
वहीं:
- ग्रामीण उद्यमी और प्रगतिशील किसान
- 40% या अधिकतम 12 लाख रुपए तक अनुदान प्राप्त कर सकेंगे
कौन स्थापित कर सकता है केंद्र
इन केंद्रों के संचालन में शामिल होंगे:
- कृषक उत्पादक संगठन (FPO)
- सहकारी समितियां (KVSS, GSS)
- राजीविका के CLF समूह
- ग्रामीण उद्यमी और प्रगतिशील किसान
इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
ग्राम पंचायत स्तर पर इन केंद्रों की स्थापना से:
- कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा मिलेगा
- किसानों की कार्यक्षमता बढ़ेगी
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी
यह योजना वैज्ञानिक खेती की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।



