2 मार्च 2026 को इको-फ्रेंडली होलिका दहन का आह्वान
सीकर, संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग सीकर डॉ. राजेन्द्र कृष्ण काला ने बताया कि प्रदेश में 2 मार्च 2026 को होलिका दहन मनाया जाएगा।
उन्होंने आमजन से अपील की है कि इस वर्ष लकड़ी के स्थान पर गोकाष्ठ का उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम बढ़ाएं।
क्यों जरूरी है गोकाष्ठ का उपयोग?
हर वर्ष होलिका दहन के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई होती है, जिससे पर्यावरण को नुकसान और प्रदूषण में वृद्धि होती है।
डॉ. काला ने कहा,
“गौशालाओं में प्राप्त गौ उत्पादों का समुचित उपयोग कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। गोकाष्ठ पर्यावरण के अनुकूल विकल्प है।”
गौशालाओं को मिलेगा सहारा
जिला, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत स्तर पर स्वयं सहायता समूहों और आमजन को जोड़कर गोकाष्ठ के अधिकाधिक उपयोग के लिए अभियान चलाया जाएगा।
इससे:
- गौशालाएं आत्मनिर्भर बनेंगी
- हजारों पेड़ों की कटाई रुकेगी
- वातावरण शुद्ध रहेगा
- पर्व का आध्यात्मिक महत्व बढ़ेगा
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पहल
गोकाष्ठ (गोबर से निर्मित लकड़ी) का उपयोग करने से न केवल कार्बन उत्सर्जन कम होगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
सीकर जिले में इस पहल को जनआंदोलन बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
आमजन से अपील
पर्यावरण संरक्षण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।
होलिका दहन में लकड़ी की जगह गोकाष्ठ का उपयोग करें।
स्थानीय गौशालाओं से गोकाष्ठ खरीदकर उन्हें सहयोग दें।
