अजीतगढ़,विमल इंदौरिया। समीपवर्ती मूंडरू के जालपाली धाम में साकेतवासी संत रामलखन दास महाराज की धूणी धाम पर आयोजित 108 कुंडात्मक श्रीराम महायज्ञ की पूर्णाहुति शुक्रवार को श्रद्धा और वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। संत हरिचरण दास महाराज के सानिध्य में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
नौ दिनों में दी गईं 51 लाख आहुतियां
महायज्ञ के यज्ञाचार्य श्रीनंदन मिश्र ने बताया कि नौ दिवसीय महायज्ञ में 260 यजमान जोड़ों ने भाग लिया। इस दौरान विभिन्न यज्ञ कुंडों में कुल 51 लाख आहुतियां प्रदान की गईं।
शुक्रवार दोपहर 12:15 बजे वेदमंत्रों के उच्चारण के बीच पूर्णाहुति संपन्न हुई।
संत महात्माओं की रही विशेष उपस्थिति
पूर्णाहुति कार्यक्रम में हरिचरण दास महाराज, सुदर्शन दास महाराज, वृंदावन सुदामा कुटी आश्रम के संत अमरदास महाराज, गलतागेट के सियाराम दास महाराज, आसपुरा के गोपालदास महाराज, राममंगल दास पावटा, रामसेवक दास जयपुर, हरिशंकर दास एवं कान्हा दास सहित अनेक संत महात्मा उपस्थित रहे।
यज्ञाचार्य नंदन मिश्र ने संतों के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूर्णाहुति संपन्न करवाई।
महाआरती और भोग के साथ हुआ समापन
पूर्णाहुति के बाद महाआरती का आयोजन किया गया तथा सीतारामजी महाराज को विशेष भोग अर्पित किया गया।
महायज्ञ संयोजक हरिचरण दास महाराज एवं सुदर्शन दास महाराज ने ब्राह्मणों और संत महात्माओं को दक्षिणा देकर सम्मानपूर्वक विदाई दी।
संत महात्माओं ने श्रद्धालुओं और यजमानों को धर्म, सेवा और सत्संग का महत्व बताते हुए आशीर्वाद प्रदान किया।
60 हजार श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया पंगत प्रसाद
पूर्णाहुति के उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। आयोजकों के अनुसार क्षेत्र के लगभग 50 गांवों से आए करीब 60 हजार श्रद्धालुओं ने शाम तक पंगत में बैठकर प्रसादी ग्रहण की।
धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी से जालपाली धाम पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा।
क्षेत्र में बना आस्था का केंद्र
नौ दिनों तक चले इस महायज्ञ में प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञ, प्रवचन और भजन-कीर्तन आयोजित किए गए। महायज्ञ के समापन पर श्रद्धालुओं ने क्षेत्र की सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की।





