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कुमार सानू ओर किशोर कुमार से कम नही है अतुल की गायकी

दिलकश भरी आवाज है युवा गायक अतुल भारद्वाज की     

दांतारामगढ़ (लिखा सिंह सैनी) दांता ठिकाने के एक प्रतिष्ठित राजवैद्य परिवार में अतुल भारद्वाज का जन्म हुआ। परिवार में संगीतमय वातावरण होने के कारण अतुल का रुझान संगीत के प्रति हुआ। पिता नटवर लाल शर्मा से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की, चाचा क्षितिज कुमार से अभिनय की सूक्ष्मता को जाना क्षितिज कुमार राजस्थानी फिल्म इंडस्ट्री के जाने माने अभिनेता है। आपके पिता भी बहुत अच्छे गायक के साथ-साथ एक नामचीन शिक्षक है। आपने अपने पिता को ही हमेशा अपना गुरु माना है, और आपने मुम्बई फ़िल्म इंडस्ट्री के नामचीन म्यूजिक डायरेक्टर दिलीप सेन समीर सेन को अपना गुरु माना और उनसे बहुत सारी संगीत की बाते सीखी। आपकी शिक्षा मध्यप्रदेश के  धार जिले  में सरस्वती शिशु मंदिर में हुई और दांता आने के बाद आपको शेखावाटी के मशहूर एंकर राजेन्द्र मधुकर का सानिध्य मिला और दोनों ने मिलकर अनेक  स्टेज शोज किए। राजेन्द्र मधुकर की प्रेरणा पाकर अतुल संगीत की साधना में तल्लीन रहने लगे। जब भी अतुल हताश और अवसादग्रस्त हुए तो राजेन्द्र मधुकर ने उनका उत्साहवर्धन किया। धीरे -धीरे अतुल की आवाज़ और अंदाज़ के सुधी श्रोता कायल हो गए, मंच से श्रोताओं का भरपूर प्यार मिलने लगा। आपको सुदूर प्रांतों से भी आयोजक बुलाने लगे । आपकी आवाज़  किशोर कुमार और कुमार सानू से मिलती जुलती होने के कारण यथाशीघ्र लोकप्रियता मिलने लगी। क्षेत्र में अपनी पहचान एक सफल गायक बतौर होने लगी है। अतुल प्रारंभ में बतौर डांसर मंच पर आए थे नृत्य से अभिनय में कदम रखा ।राजस्थानी फिल्म कन्यादान द फोर्टिसाइड में आपने पुलिस इंस्पेक्टर का अभिनय किया। हाल ही में आपने दो राजस्थानी फिल्म में गीत गाये है। थाको ब्याव होगो के फ़िल्म में दो गीत गाये हैं, जो जल्द ही रिलीज होने वाली है। दिलकश आवाज़ के धनी अतुल ने राघव जुयाल “क्रोकरोज “के साथ मंच साझा भी कर चुके है। आपने लॉकडाउन में बहुत सुंदर कविता लिखी आज बस एक ही बात का रोना है पूरे विश्व मे कोरोना ही कोरोना है दुनिया की महाशक्तियां बेबस और लाचार हो गई, जो घर मे ही रहे उनकी जय जय कार हो गई ,मजबूरियों ने हमे जीना सीखा दिया ,बिना काम बिना आमदनी का जहर पीना सीखा दिया। हर कोई अपनी और से सहयोग कर रहा है ,पूरा विश्व भारत नीति का प्रयोग कर रहा है। कुछ दिन सहन करो ये वक्त भी गुजर जाएगा ,मोदीजी के नेतृत्व में भारत विश्व गुरु बन जायेगा। क्या हिन्दू क्या मुस्लिम सभी को साथ निभाना है हम सब एक है बस कोरोना को मार भगाना है। ये कविता इन्होंने लिखी जिसे लोगो ने बहुत पसंद किया आपने लॉक डाउन में एक गीत भी लिखा और स्वयं अपनी आवाज दी। अभी अतुल अपना अतुल भारद्वाज के नाम से यूट्यूब चैनल चलाते है जिसमे उन्होंने बहुत सुंदर गीत गाये है उस यूट्यूब चैनल को भी लोगो का भरपूर प्यार मिल रहा है। आगे उसमे भजन और गीत के माध्यम से सभी का दिल जीतने का मन हैं। आपने इस लॉकडाउन में सभी को पॉजिटिव रहने के लिए भी प्रेरित किया, और कहा की जब भी आप संगीत सुनते है तो आपमे पॉजिटिव शक्ति का संचार होता है। संगीत के लिए युवाओं को आपने संदेश दिया की संगीत एक ऐसा सागर है जिसका कोई अंत नहीं हमेशा सीखते रहे और दिल से  के साथ गाये और रियाज़ करते रहें। संगीत सुनते- सुनते ये कठोर समय भी निकल जायेगा। उन्होंने जो लोग आत्महत्या कर रहे है उनके लिए भी दुःख जाहिर किया और कहा ज़िन्दगी के हर मोड़ पर उतार चढ़ाव आते रहते है। उन्हें पॉजिटिव शक्ति के साथ सब संकटो का सामना करते हुए आगे की राह तय करना चाहिए आत्महत्या ही समाधान नही है।

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