खाटूश्यामजी से निकली तिरंगा यात्रा, बेटे दिव्यांशु ने दी मुखाग्नि
खाटूश्यामजी के नजदीक स्थित मगनपुरा निवासी हवलदार गिरधारी लाल कुमावत का उत्तराखंड के रुड़की में ड्यूटी के दौरान निधन हो गया।
बताया जा रहा है कि वे साथियों के साथ क्रिकेट खेल रहे थे। इसी दौरान अचानक सीने में तेज दर्द उठा। तबीयत बिगड़ने पर वे स्वयं बाइक चलाकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन इलाज शुरू होने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
यह खबर गांव पहुंचते ही परिवार में मातम छा गया।
2013 में हुए थे सेना में भर्ती
33 वर्षीय गिरधारी लाल वर्ष 2013 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। वे रुड़की में 56 एपीओ बीईजी रिकॉर्ड्स में क्लर्क पद पर तैनात थे।
कर्तव्यनिष्ठ और शांत स्वभाव के कारण वे साथियों में सम्मानित थे। उनके असमय निधन से सेना और गांव दोनों में शोक की लहर है।
तिरंगा यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
शाम 5:30 बजे उनकी पार्थिव देह रुड़की से रवाना की गई और 3 मार्च को गांव पहुंची।
गांव में प्रवेश करते ही लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
खाटूश्यामजी से मगनपुरा तक तिरंगा यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण और गणमान्य नागरिक शामिल हुए। देशभक्ति नारों के बीच माहौल भावुक हो उठा।
बेटे ने दी मुखाग्नि
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सेना के जवानों ने उन्हें सलामी दी।
इस दौरान उनके छह वर्षीय बेटे दिव्यांशु ने पिता को मुखाग्नि दी। यह दृश्य इतना मार्मिक था कि मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
18 जाट रेजिमेंट के सूबेदार दिगम्बर सिंह ने शहीद के पुत्र दिव्यांशु को तिरंगा सौंपा। तिरंगा हाथ में थामे मासूम बेटे को देख हर कोई भावुक हो गया।
जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि
श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में सांसद अमराराम, भाजपा नेता गजानंद कुमावत, सरपंच प्रभू सिंह गोगावास, बजरंग ताखर और मगनपुरा सरपंच सुरेश वर्मा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
सभी ने वीर सपूत को नमन करते हुए परिवार को सांत्वना दी और उनके समर्पण को याद रखा।
