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निजी आय से 20 करोड़ रूपये की लागत से शहीदों की मूर्ति स्थापित करवाएगे प्रेम सिंह बाजोर

राज्य सैनिक कल्याण सलाहकार समिति के अध्यक्ष एवं नीमकाथाना विधायक प्रेमसिंह बाजौर ने एक अप्रेल 2017 को प्रदेश में शहीद सैनिक यात्रा का शुभारम्भ झुंझुनूं से कर  अब तक वे 22 जिलों में 804 शहीद सैनिक, वीरांगनाओं, परिजनों का घर-घर जाकर शॉल ओढ़ाकर सम्मान कर चुके हैं। अध्यक्ष बाजौर ने सीकर जिले में 17 अप्रेल से 4 मई 2018 तक 212 शहीद सैनिक वीरांगनाओंं, सहित 1016 परिजनोें का सम्मान किया जा चुका है। उन्होंने झुंझुनूं जिले में शहीद सैनिकों के 10 आश्रितों को नियोजन भी दिलाया। बाजौर ने कहा कि वे अपनी निजी आय से 20 करोड़ रूपये की लागत से शहीदों की मूर्ति स्थापित कर अमर शहीदों की स्मृति को चिरस्थाई करने का कार्य करेंगे। राज्य सैनिक कल्याण बोर्ड अध्यक्ष प्रेमसिंह बाजौर शनिवार को सर्किट हाउस में सीकर जिले में शहीद सैनिक सम्मान यात्रा पर आयोजित प्रेस वार्ता में बोल  रहे थे। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान उन्हें शहीद सैनिक परिवारों एवं ग्रामवासियों के 1440 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए थे जिनमें से  सीकर जिले के 204 अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं जिनका निस्तरण एक माह में करने के लिए जिला प्रशासन को निर्देशित किया गया है। पूूरे प्रदेश में 1650  सैनिक शहीद हुए है जिनमें सें 500 शहीदों की मूर्ति पैतृक गांवो में बनी हुई है तथा शेष 1150 शहीदों की मूर्तियां वे स्वंय के खर्चे से एवं जनसहयोग से बनवाई जाएगी जिनमें चार दीवारी, स्टेच्यू तैयार किए जाएंगे। शहीद की मूर्तिया आने वाली पीढ़ी को सदैव प्रेरणा देती रहेगी। यह राज्य सरकार द्वारा अनूठा प्रयास किया गया है। हम सभी की जिम्मेदारी बनती है कि शहीदों को मान -सम्मान देने का कार्य करें। उन्होंने 23 जिलों में लगभग एक लाख किलोमीटर की यात्रा पूर्ण कर ली हैं। उन्होंने बताया कि जिला सैनिक कल्याण कार्यालय को सैनिकों के पेंशन एवं अन्य प्रकरणों को शीघ्र निस्तरण करने के निर्देश दिए गए है। बाजौर ने शहीद सम्मान यात्रा के दौंरान जिले  के असहाय निर्बल व दिव्यांग व्यक्तियों को अपनी नीजी आय से 25 लाख रूपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। शहीद सैनिक यात्रा का उल्लेख लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए स्वीकार हो चुका है। उन्होंने कहा कि शहीद को देवता  माना जाता है तथा शहीदों को  कोई भी जाति  में नही बांटना चाहिए। सीकर सांसद सुमेधानन्द सरस्वती ने प्रेसवार्ता में कहा कि अध्यक्ष बाजौर ने शहीद परिवारों के घर-घर जाकर उनका सम्मान करने का कार्य किया है वह भारत में ही नहीं पूरे विश्व में एक महत्वपूर्ण कदम है। सैनिक कड़ी धूप, बरसात, सर्दी के मौसम में देश की सीमा की सुरक्षा कर हमें चैन की नींद सोने देते है तथा वक्त आने पर अपनी जान भी देश पर न्यौछावर करते है। केन्द्र सरकार ने सैनिकों की समस्याओं को समझ कर वन रैंक , वन पेंशन लागू की है। उन्होंने कहा कि राज्य की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे की उदारता है कि शहीद के एक आश्रित को सरकारी नौकरी प्रदान की जा रही है । उन्होंने कहा कि आजादी के बाद 1999 से पूर्व जितने भी शहीद हुए थे उन्हें केन्द्र व राज्य सरकार के  प्रयासों से पैकेज, एक आश्रित को नौकरी, भूमि आवंटन, स्टेच्यू मूर्ति व अन्य योजनाओं का लाभ दिया जा रहा हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री राज्य बंशीधर बाजिया ने इस अवसर पर कहा कि शहीद परिजनों का सम्मान करना धर्म का कार्य है। हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम सुख-दुःख में उनके साथ रह कर उन्हें सम्बल देवें। प्रेसवार्ता में जिला प्रमुख अपर्णा रोलन, सीकर विधायक रतन लाल जलधारी,नगर सुधार न्याय अध्यक्ष हरिराम रणवां, पूर्व विधायक लक्ष्मणगढ़ के.डी. बाबर, इन्दिरा चौधरी शहीद सैनिक सम्मान समिति के सदस्य कर्नल जगदेव सिंह, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी सीकर सागरमल सैनी सहित प्रिंट व इलेक्ट्रोनिक मीडिया कर्मी उपस्थित रहें। जिले मेेंं शहीद सम्मान यात्रा के दौरान सांसद सुमेधानन्द सरस्वती, शहीद के पिता सांवलराम यादव, पाटन प्रधान संतोष गुर्जर, जिला परिषद सदस्य मोन्टू कृष्णियां, कल्पना यादव, वीना वर्मा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री बंशीधर बाजिया, धोद विधायक गोर्वधन वर्मा, पंचायत समिति सदस्य , जन प्रतिनिधि, नीमकाथाना सुरेन्द्र सिंह सम्मिलित रहे।

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