पाटन में पशु चिकित्सा संकट, 3 बजे बाद इलाज नहीं
सीकर जिले के पाटन कस्बे में वेटरनरी पॉलीक्लिनिक नहीं होने से पशुपालकों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
यहां पशु चिकित्सालय दोपहर 3 बजे बंद हो जाता है, इसके बाद आपातकालीन इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है।
125 किमी दूर ले जाने को मजबूर पशुपालक
गंभीर रूप से बीमार पशुओं को
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सर्जरी
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मेडिसिन
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गायनी (मादा रोग)
जैसी एडवांस सुविधाओं के लिए 125 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय या फिर हरियाणा ले जाना पड़ता है।
इससे समय और धन दोनों की भारी बर्बादी होती है।
जांच सुविधाओं का पूरी तरह अभाव
पाटन में
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एक्स-रे
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सोनोग्राफी
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रक्त, पेशाब और गोबर जांच
जैसी बुनियादी जांच सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।
बिना जांच के इलाज होने से पशु मृत्युदर बढ़ने की आशंका बनी रहती है।
सरपंचों के बाद अब आमजन भी मुखर
पाटन के सरपंच पहले ही पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत को पत्र लिख चुके हैं।
अब पाटनवाटी क्षेत्र के पशुपालक और आमजन भी एक सुर में मांग कर रहे हैं कि
आगामी बजट में पाटन को वेटरनरी पॉलीक्लिनिक की सौगात मिले।
पाटन का दावा क्यों है मजबूत
पाटन को पशु जिला अस्पताल बनाने के ठोस कारण
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जिला मुख्यालय से 125 किमी दूरी
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खेतड़ी, नीमकाथाना, उदयपुरवाटी में भी पॉलीक्लिनिक नहीं
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आसपास के क्षेत्र में लगभग 7 लाख पशुधन
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3 बजे बाद कोई चिकित्सा सुविधा नहीं
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पॉलीक्लिनिक बनने से 24 घंटे इलाज संभव
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समय पर उपचार से पशु मृत्युदर में कमी
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एक्स-रे, सोनोग्राफी और लैब जांच की सुविधा
पशुपालकों को मिलेगी अत्याधुनिक चिकित्सा
यदि पाटन में वेटरनरी पॉलीक्लिनिक / बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय खुलता है तो
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मेडिसिन, सर्जरी व गायनी विशेषज्ञ
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छोटे-बड़े पशुओं के ऑपरेशन थिएटर
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सिजेरियन, हर्निया, पथरी, हॉर्न कैंसर जैसे ऑपरेशन
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इंडोर वार्ड में भर्ती सुविधा
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100 से अधिक गौशालाओं के गौवंश को बेहतर इलाज
जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
बजट घोषणाओं से पाटन की उम्मीद बढ़ी
सरकार ने
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2024-25 और 2025-26
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प्रत्येक वर्ष 25 प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालयों को
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बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय में क्रमोन्नत करने की घोषणा की है।
इसी क्रम में अब पाटन को पशु जिला अस्पताल बनाने की मांग जोर पकड़ रही है।
विशेषज्ञ की राय
डॉ. योगेश आर्य, पशुचिकित्सा विशेषज्ञ, नीमकाथाना का कहना है—
भौगोलिक स्थिति, पशुधन संख्या और चिकित्सा आवश्यकता के आधार पर पाटन पॉलीक्लिनिक के सभी मापदंड पूरे करता है।
