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बोलता बालाजी धाम में संत समागम, मठ-मंदिर भूमि संरक्षण का संकल्प

Sikar News (सीकर समाचार) : बोलता बालाजी धाम में संत समागम, मठ-मंदिर भूमि संरक्षण का संकल्प

सैकड़ों संत-महंतों ने मठ, मंदिर और गोचर भूमि संरक्षण पर जताई एकता

सीकर सीकर जिले के प्रसिद्ध बोलता बालाजी धाम में आज संत समागम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें जिले भर से आए सैकड़ों संत, मठ-मंदिरों के महंत और पुजारी शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मठ, मंदिर और गोचर भूमि पर हो रहे कब्जों को रोकना और समाज को एकजुटता का संदेश देना रहा।

सनातन की एकता पर जोर

संतों ने एक स्वर में कहा कि पहले सनातन धर्म में फूट डालकर उसे कमजोर करने का प्रयास किया जाता था, लेकिन अब सभी संत और संप्रदाय एकजुट हैं और ऐसा किसी भी हाल में नहीं होने देंगे।

“अब अवसर चूकना नहीं चाहते संत” – दिनेश गिरी महाराज

बुधगिरी मढ़ी के महंत दिनेश गिरी महाराज ने कहा

“देश आजादी के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा है। यह वह समय है जब भगवा अपने शिखर पर है। ऐसे ऐतिहासिक अवसर को संत किसी भी कीमत पर चूकना नहीं चाहते।”

उन्होंने कहा कि

  • गौ माता का संरक्षण
  • भारत का हिंदू राष्ट्र के रूप में सशक्त होना
  • भारत का पुनः विश्व गुरु बनना

यही सभी संतों का साझा लक्ष्य है।
उन्होंने बताया कि इस समागम में छोटे आश्रम से लेकर बड़े मठों तक के संत एक मंच पर एकत्र हुए हैं।

मठ-मंदिरों पर हस्तक्षेप का विरोध

वेंकटेश पीठाधीश्वर लोहार्गल धाम के अश्विनी महाराज ने कहा

“समाज में एकजुटता की बात तो होती है, लेकिन छोटे मंदिरों के पुजारियों पर हस्तक्षेप, मठों को जर्जर करना और उनकी जमीन या गोचर भूमि पर कब्जे जैसी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि इन अन्यायपूर्ण कार्यों को रोकने के लिए सभी संत एकजुट हुए हैं।

गोचर और धार्मिक भूमि पर कब्जों पर चिंता

संतों ने कहा कि

  • गोचर भूमि पर अतिक्रमण
  • मठ-मंदिरों की संपत्ति पर कब्जा
  • पुजारियों और साधु-संतों को मानसिक पीड़ा

जैसी समस्याएं गंभीर हैं। इन्हें रोकने के लिए सामूहिक प्रयास और जागरूकता जरूरी है।

समाज को दिया एकजुटता का संदेश

समागम के माध्यम से संतों ने समाज को संदेश दिया कि धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए सभी को एकजुट होना होगा। संतों ने कहा कि जो कार्य राजनीति नहीं कर सकती, वह साधु-संत समाज को जोड़कर कर सकते हैं

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