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Sikar News : शेखावाटी विश्वविद्यालय में अब ‘भारत’ शब्द का होगा उपयोग

विश्वविद्यालय के प्रमाण पत्र, वेबसाइट और दस्तावेजों में नहीं लिखा जाएगा ‘इंडिया’

Shekhawati University Sikar adopts Bharat word in official documents

सीकरपंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय के प्रबंध बोर्ड (BOM) की बैठक में बड़ा निर्णय लेते हुए विश्वविद्यालय के सभी आधिकारिक दस्तावेजों में ‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’ तथा अंग्रेजी में ‘BHARAT’ शब्द उपयोग करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।

अब विश्वविद्यालय की वेबसाइट, लेटरहेड, प्रमाण पत्र, डिग्री और अन्य प्रशासनिक दस्तावेजों में ‘इंडिया’ शब्द का उपयोग नहीं किया जाएगा।

भारतीय पहचान को मजबूत करने की पहल

कुलगुरु प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार राय ने बताया कि यह निर्णय भारतीय पहचान, भाषा और सांस्कृतिक मूल्यों को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि ‘भारत’ शब्द देश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत का प्रतीक है। संस्थागत स्तर पर इसे अपनाने से विद्यार्थियों में राष्ट्रीय चेतना और गौरव की भावना मजबूत होगी।

कुलगुरु ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 में भी भारतीय भाषाओं और परंपराओं को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है और विश्वविद्यालय का यह निर्णय उसी भावना के अनुरूप है।

राजनीति विज्ञान पाठ्यक्रम में भी होगा बदलाव

उपकुलसचिव (अकादमिक) रामसिंह सरावग ने बताया कि विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान पाठ्यक्रम में ‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’ शब्द किया जा चुका है।

उन्होंने कहा कि अन्य विषयों के पाठ्यक्रमों में भी आगामी बोर्ड ऑफ स्टडीज बैठकों में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।

सरावग के अनुसार, ‘भारत’ देश की ऐतिहासिक निरंतरता, आध्यात्मिक गहराई और संप्रभु पहचान का प्रतीक है, जबकि ‘इंडिया’ शब्द औपनिवेशिक संदर्भों से जुड़ा माना जाता है।

कई संस्थानों ने अपनाई यह नीति

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार देश के कई विश्वविद्यालय और केंद्रीय संस्थान पहले ही अपने शैक्षणिक एवं प्रशासनिक दस्तावेजों में ‘भारत’ शब्द को औपचारिक रूप से लागू कर चुके हैं।

इग्नू और एनसीईआरटी जैसी संस्थाओं की समितियों ने भी पाठ्यपुस्तकों और दस्तावेजों में ‘भारत’ शब्द के उपयोग की सिफारिश की है।

विद्यार्थियों में बढ़ेगी सांस्कृतिक जागरूकता

कुलगुरु प्रो. राय ने कहा कि इस निर्णय से विद्यार्थियों में राष्ट्रीय अस्मिता और भारतीय भाषाओं के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों में ‘भारत’ शब्द के उपयोग से भाषा आधारित समावेशिता को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं में सांस्कृतिक आत्मविश्वास मजबूत होगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह पहल अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण बन सकती है।

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