राज्यपाल बोले— नालंदा-तक्षशिला जैसा गौरव फिर लौटेगा
सीकर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय में शनिवार को छठवां दीक्षांत समारोह धूमधाम से आयोजित किया गया।
इस अवसर पर प्रेरणा स्थल, अनुसंधान केंद्र और हस्तशिल्प प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया गया।
40 विद्यार्थियों को मिला गोल्ड मेडल
समारोह में 40 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया।
इसके साथ ही हजारों विद्यार्थियों को विभिन्न संकायों में स्नातक और स्नातकोत्तर उपाधियां प्रदान की गईं।
कला, विज्ञान, वाणिज्य, समाज विज्ञान, शिक्षा और विधि संकाय के विद्यार्थियों को उपाधि दी गई।
मानद उपाधि भी प्रदान
कार्यक्रम में रामचन्द्र नीलकंठ भोगले, डॉ. धनपत राम अग्रवाल और शैलेंद्रनाथ अघोरी बाबा को मानद उपाधि प्रदान की गई।
राज्यपाल का प्रेरक संबोधन
राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा,
“भारत का स्वर्णिम अवसर हमारा विश्वविद्यालय लाएगा, नालंदा और तक्षशिला का इतिहास लौटकर आएगा।”
उन्होंने शिक्षा को गरीबी दूर करने का सबसे बड़ा माध्यम बताते हुए विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपील की।
शिक्षा और संस्कार पर जोर
राज्यपाल ने कहा कि प्राचीन भारत के नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालयों की परंपरा को आगे बढ़ाने की जरूरत है।
उन्होंने गुरुकुल पद्धति का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें शिक्षा के साथ-साथ चरित्र निर्माण और नैतिक मूल्यों पर भी जोर दिया जाता था।
राजस्थान की गौरवशाली पहचान
राज्यपाल ने राजस्थान को वीरों की भूमि बताते हुए कहा कि यहां से सेना में सबसे अधिक जवान जाते हैं।
साथ ही शेखावाटी क्षेत्र को देश की आर्थिक रीढ़ बताते हुए बिड़ला, बजाज, अग्रवाल और मोदी जैसे औद्योगिक घरानों का उल्लेख किया।
विद्यार्थियों के लिए संदेश
उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत है।
विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा का उपयोग समाज और देश के विकास में करना चाहिए।
ये रहे मौजूद
इस अवसर पर विश्वविद्यालय कुलगुरु डॉ. अनिल कुमार राय, प्रो. जगमोहन सिंह राजपूत (पद्मश्री),
जिला कलेक्टर मुकुल शर्मा, पुलिस अधीक्षक प्रवीण नायक और रजिस्ट्रार श्वेता यादव सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
