सीकर जिले में बाल विवाह रोकने के लिए प्रशासन लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है। आखा तीज और पीपल पूर्णिमा जैसे अबूझ सावों के दौरान मिली सूचनाओं पर कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने जिलेभर में 8 बाल विवाह रुकवाए हैं।
चाइल्ड हेल्पलाइन पर मिली थीं सूचनाएं
जिला बाल संरक्षण इकाई एवं बाल अधिकारिता विभाग की सहायक निदेशक गार्गी शर्मा ने बताया कि जिले में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर बाल विवाह की सूचनाएं प्राप्त हुई थीं।
सूचना मिलते ही प्रशासनिक टीम संबंधित स्थानों पर पहुंची और बच्चों के दस्तावेजों की जांच की।
12 से 17 वर्ष के मिले नाबालिग
जांच के दौरान बालक और बालिकाएं 12 से 17 वर्ष आयु वर्ग के नाबालिग पाए गए।
इसके बाद प्रशासन ने:
- परिजनों को नोटिस जारी किए
- बाल विवाह नहीं करने के लिए पाबंद किया
- कानून उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी
कोर्ट ने जारी किए निषेधाज्ञा आदेश
कुछ क्षेत्रों में प्रशासन की चेतावनी के बावजूद विवाह की तैयारियां जारी थीं। इसे गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बाल अधिकारिता विभाग और चाइल्ड हेल्पलाइन के सहयोग से न्यायालय का सहारा लिया।
श्रीमाधोपुर, नीमकाथाना और खंडेला न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किए गए, जिसके बाद न्यायालय ने:
- बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की धारा 13(1) के तहत
- जिले में पहली बार
- 3 निषेधाज्ञा आदेश जारी किए
जिससे प्रस्तावित बाल विवाह कानूनी रूप से रुकवाए गए।
प्रशासन ने बताया महत्वपूर्ण कदम
प्रशासन ने इसे जिले में बाल विवाह रोकथाम की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया है।
इसके बाद संबंधित परिजनों को न्यायालय में उपस्थित कर दोबारा सख्ती से पाबंद किया गया।
आमजन से की अपील
जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिले तो तुरंत:
- चाइल्ड हेल्पलाइन 1098
- पुलिस हेल्पलाइन 100
पर जानकारी दें।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
ये अधिकारी रहे सक्रिय
इस अभियान के दौरान:
- जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव डॉ. शालिनी गोयल
- चाइल्ड हेल्पलाइन जिला समन्वयक राहुल दानोदिया
- काउंसलर राकेश चिरानिया
- सुनीता
- ममता सैनी
- कृष्णकांत माथुर
सहित पुलिस और प्रशासनिक टीम सक्रिय रूप से मौजूद रही।




