सीकर । राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RALSA) के निर्देशानुसार जिला एवं सेशन न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष रूपा गुप्ता तथा सचिव शालिनी गोयल ने जिला कारागृह सीकर का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान कारागृह में उपलब्ध सुविधाओं, बंदियों के अधिकारों और न्यायिक प्रक्रियाओं की समीक्षा की गई।
कैदियों को भी है गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार
निरीक्षण के दौरान अध्यक्ष रूपा गुप्ता ने कहा कि गरिमापूर्ण जीवन और त्वरित सुनवाई का अधिकार जेल में बंद कैदियों को भी प्राप्त है। उन्होंने नालसा एवं रालसा द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप कारागृह की व्यवस्थाओं और मानकों का निरीक्षण किया।
“संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का लाभ प्रत्येक व्यक्ति को मिलना चाहिए, चाहे वह जेल में निरुद्ध क्यों न हो।” — रूपा गुप्ता
भोजन, चिकित्सा और स्वच्छता व्यवस्थाओं का लिया जायजा
अध्यक्ष और सचिव ने कारागृह में निरुद्ध बंदियों को विभिन्न विधिक अधिकारों की जानकारी दी। साथ ही जेल मैनुअल के तहत उपलब्ध कराई जा रही भोजन, चिकित्सा और साफ-सफाई संबंधी सुविधाओं की भी समीक्षा की।
निरीक्षण के दौरान जेल के रसोईघर का अवलोकन किया गया और बंदियों से भोजन की गुणवत्ता को लेकर फीडबैक भी प्राप्त किया गया।
निःशुल्क विधिक सहायता की दी जानकारी
बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बयान दर्ज कराने की सुविधा तथा धारा 436ए के तहत जमानत के प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
अधिकारियों ने बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने पर विशेष जोर दिया।
त्वरित न्याय के लिए दिए निर्देश
अध्यक्ष रूपा गुप्ता ने न्यायिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी नहीं होने तथा मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए।
उन्होंने विशेष रूप से ऐसे बंदियों के मामलों में संवेदनशीलता बरतने को कहा, जिनकी जमानत मंजूर हो चुकी है, लेकिन जमानती नहीं मिलने के कारण वे अब भी जेल में निरुद्ध हैं।
ये अधिकारी रहे मौजूद
निरीक्षण के दौरान कारापाल सुषमा सैन, हेमन्त कुमार मीणा, नरेश कुमार मीणा तथा बृजेन्द्र सिंह रूलानियां (चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल, सीकर) सहित जिला कारागृह एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का स्टाफ मौजूद रहा।





