सीकर, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
अब कार्यस्थलों पर श्रमिकों की उपस्थिति नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) ऐप के माध्यम से फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम द्वारा लाइव दर्ज की जा रही है।
तकनीक से मजबूत हुई निगरानी
विभागीय अधिकारियों के अनुसार डिजिटल उपस्थिति प्रणाली लागू होने से मनरेगा कार्यस्थलों की निगरानी अधिक प्रभावी हुई है।
इससे फर्जी उपस्थिति पर नियंत्रण लगा है और श्रमिकों की उपस्थिति का ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार हो रहा है।
“तकनीक आधारित व्यवस्था से पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों मजबूत हुई हैं।” विभागीय अधिकारी
तकनीकी बाधा आने पर भी मिलेगा भुगतान
अधिकारियों ने बताया कि यदि किसी क्षेत्र में नेटवर्क समस्या, सर्वर बाधा या अन्य तकनीकी कारणों से एनएमएमएस ऐप पर उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती, तो भी श्रमिकों का भुगतान नहीं रुकेगा।
इसके लिए एरिया ऑफिसर मॉनिटरिंग ऐप के माध्यम से वैकल्पिक सत्यापन व्यवस्था लागू की गई है।
जियो टैग्ड फोटो से होगा सत्यापन
इस व्यवस्था के तहत एरिया ऑफिसर कार्यस्थल का निरीक्षण कर जियो टैग्ड और टाइम-स्टैम्प्ड फोटो अपलोड करते हैं।
इसके आधार पर वास्तविक स्थिति का सत्यापन कर मैन्युअल मस्टर रोल को वैध माना जाता है और भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।
श्रमिकों के हितों की सुरक्षा पर जोर
विभाग का कहना है कि किसी भी वास्तविक श्रमिक की मजदूरी तकनीकी खराबी के कारण प्रभावित न हो, इसके लिए विशेष व्यवस्था की गई है।
डिजिटल तकनीक और मानवीय सत्यापन की संयुक्त प्रक्रिया से समय पर भुगतान सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है।
भ्रष्टाचार पर लग रहा नियंत्रण
अधिकारियों के अनुसार तकनीक आधारित यह प्रणाली मनरेगा कार्यों को अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी बना रही है।
इससे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर नियंत्रण के साथ ग्रामीण श्रमिकों को योजनाओं का लाभ भी अधिक सुगमता से मिल रहा है।





