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Sikar News: जल स्वावलम्बन 2.0 में राज्य में प्रथम, 107% प्रगति

Sikar News (सीकर समाचार) : Sikar News: जल स्वावलम्बन 2.0 में राज्य में प्रथम, 107% प्रगति

4820 कार्य पूर्ण कर 107% प्रगति, जल संरक्षण में नया कीर्तिमान

सीकर |राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान 2.0 के प्रथम चरण में सीकर जिले ने पूरे राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यह सफलता जिले के जल संरक्षण प्रयासों को नई पहचान देती है।

योजना की पृष्ठभूमि

यह अभियान 15 फरवरी 2024 को बजट घोषणा के तहत शुरू किया गया था।
इसका उद्देश्य प्रदेश के गांवों को जल के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है।

प्रथम चरण में

  • राजस्थान के 5000 से अधिक गांव शामिल
  • करीब 3500 करोड़ रुपये की लागत
  • लगभग 1.10 लाख जल संग्रहण संरचनाओं का लक्ष्य

सीकर जिले में कार्य का दायरा

सीकर जिले में

  • 12 ब्लॉकों की
  • 65 ग्राम पंचायतों के
  • 136 गांवों को योजना में शामिल किया गया।

यहां 90 करोड़ रुपये की लागत से 4513 जल संरक्षण कार्यों का लक्ष्य तय किया गया था।

आठ विभागों का समन्वय

इस अभियान को सफल बनाने में
जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज, वन, कृषि, उद्यान, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी और सिंचाई विभाग सहित 8 विभागों के समन्वित प्रयास रहे।

बनीं हजारों जल संरक्षण संरचनाएं

जिले में प्रमुख रूप से

  • 3346 टांके
  • 713 फार्म पॉन्ड्स
  • 61 एनीकट
  • 57 मिनी परकोलेशन टैंक
  • 55 रिचार्ज संरचनाएं
  • 21 तालाबों का निर्माण/जीर्णोद्धार
  • 275 स्प्रिंकलर सिस्टम
    तैयार किए गए।

107% प्रगति, राज्य में सबसे आगे

31 दिसंबर 2025 तक की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार

  • लक्ष्य: 4513 कार्य
  • पूर्ण: 4820 कार्य
  • प्रगति: 107%

यह राज्य में सर्वाधिक है, जिसके आधार पर सीकर को प्रथम स्थान मिला।

प्रशासनिक नेतृत्व का योगदान

यह उपलब्धि जिला कलेक्टर मुकुल शर्मा की सतत निगरानी व मार्गदर्शन तथा
जिला परिषद सीईओ राजपाल यादव के सहयोग का परिणाम है।

किसानों और ग्रामीणों को सीधे लाभ

रमेश कुमार मीना, अधीक्षण अभियंता (जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण) ने बताया

“इस अभियान से फ्लोराइड-मुक्त शुद्ध वर्षा जल उपलब्ध हुआ है। भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया है।”

  • प्रत्येक फार्म पॉन्ड में औसतन 15 लाख लीटर वर्षा जल संग्रह
  • सिंचाई, सब्जी उत्पादन और फलदार पौधारोपण को बढ़ावा
  • पहले व्यर्थ बहने वाला वर्षा जल अब भूमि संरक्षण और भूजल रिचार्ज में सहायक