शेखावाटी यूनिवर्सिटी सीकर में बनेगा भारतीय ज्ञान परंपरा केन्द्र, BOM ने दी मंजूरी
सीकर। पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय की प्रबंध बोर्ड (BOM) बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विस्तार और नवाचार से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इनमें सबसे अहम निर्णय ‘भारतीय ज्ञान परंपरा केन्द्र’ की स्थापना का रहा, जिसे बोर्ड ने सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान की।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह केन्द्र विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, दर्शन, विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप पहल
कुलगुरु प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार राय ने बताया कि केन्द्र की स्थापना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप की जा रही है।
उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी मार्गदर्शक है।
“भारतीय ज्ञान परंपरा में खगोल विज्ञान, गणित, तर्कशास्त्र, आयुर्वेद और जीवन प्रबंधन जैसे अनेक महत्वपूर्ण आयाम समाहित हैं।” — प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार राय, कुलगुरु
शोध, प्रशिक्षण और व्याख्यानमालाओं का होगा आयोजन
प्रस्तावित केन्द्र के माध्यम से विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
इनमें शामिल होंगे:
- व्याख्यानमाला
- कार्यशालाएं
- प्रशिक्षण कार्यक्रम
- शोध गतिविधियां
- भारतीय ज्ञान-विज्ञान पर आधारित अध्ययन
साथ ही शेखावाटी क्षेत्र की लोक संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
शोधार्थियों को मिलेगा नया मंच
कुलगुरु प्रो. राय ने बताया कि यह केन्द्र शोधार्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित होगा। यहां प्राचीन ग्रंथों, पांडुलिपियों और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों पर गहन अध्ययन एवं अनुसंधान किया जा सकेगा।
इससे भारतीय ज्ञान परंपरा के दस्तावेजीकरण और संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
विद्यार्थियों को होंगे बहुआयामी लाभ
उपकुलसचिव (अकादमिक) रामसिंह सरावग के अनुसार यह केन्द्र विद्यार्थियों के बौद्धिक, नैतिक और सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
उन्होंने बताया कि केन्द्र के माध्यम से विद्यार्थियों को:
- भारतीय जीवन दर्शन को समझने का अवसर मिलेगा।
- नैतिक मूल्यों का विकास होगा।
- प्राचीन ज्ञान-विज्ञान को आधुनिक संदर्भों में समझ सकेंगे।
- पारंपरिक प्रबंधन और जीवन कौशल सीखने का अवसर मिलेगा।
- अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव मजबूत होगा।
इतिहास पाठ्यक्रम में भी शामिल हुआ भारतीय ज्ञान परंपरा विषय
रामसिंह सरावग ने बताया कि हाल ही में विश्वविद्यालय के इतिहास विषय अध्ययन मंडल ने स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में भी भारतीय ज्ञान परंपरा विषय को व्यापक स्वरूप में शामिल किया है।
इससे विद्यार्थियों को भारतीय बौद्धिक परंपराओं के अध्ययन का बेहतर अवसर मिलेगा।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में बढ़ रही भारतीय ज्ञान की प्रासंगिकता
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भारतीय ज्ञान, संस्कृति और मूल्यों की स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है।
ऐसे में यह केन्द्र स्थानीय युवाओं को वैश्विक दृष्टिकोण प्रदान करेगा, ताकि वे अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।





