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माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने वाले दल ने जिला कलेक्टर से की चर्चा

पर्यावरण पर

सीकर, विश्व की सबसे ऊंची पवर्त चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने और 11 देशों में 4 लाख 25 हजार किलोमीटर की यात्राा करने वाले पर्वतारोहियों का दल गुरूवार को सीकर जिले में पहुंचा। यहां उन्होंने जिला कलेकटर अविचल चतुर्वेदी से मुलाकात कर पर्यावरण एवं सामाजिक सुधार के संदेश को लेकर चर्चा की । जिला कलेक्टर ने दल के सदस्यों के अदम्य साहस और कल्याणकारी योजनाओं के प्रचार—प्रसार के लिए किए जा रहे कार्यो की प्रशंसा की । उन्होंने दल के सदस्यों से पर्यावरण सुरक्षा के लिए विभिन्नन राज्यों एवं देशों में किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली तथा युवाओं को संदेश देने के लिए पैदल यात्रा के माध्यम से सम्पर्क करने की सोच की सराहना की।

वाई.जे.ए.जे अन्तरवेद एडवांचर्स स्पोर्टस लोंगिस्ट वल्र्ड टुअर ओन फूट सेवा संस्थान के सदस्य गोविन्दानंद, जितेन्द्र प्रताप, महेन्द्र प्रताप,अवध बिहारी लाल उत्तर प्रदेश ने बताया कि पर्वतारोहियों के दल ने शहर में सड़क सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण एवं अन्य सामाजिक विषयों पर आमजन को जानकारी दी। दल के सदस्यों की ओर से सड़क सुरक्षा, बेटी—बचाओं, बेटी—पढ़ाओं, नशा मुक्ति सहित अन्य जागरूक कार्यक्रमों के बारे में यात्रा के दौरान विभिन्न क्षेत्रो में लोगों से सीधा संवाद कर प्रचार—प्रसार किया जा रहा है।

पर्वतारोहियों के दल ने बताया कि शहर के सभी चौराहों पर एवं जितने भी वाहन डीलर है जो वाहन बेचते हैं उनके यहां पर एक वॉइस रिकॉर्डिंग टेप लगाना चाहिए जिससे लोगों को हेलमेट लगाने के लिए और सीट बेल्ट लगाने के लिए प्रेरित किया जा सके। उन्होंने बताया कि सभी लोग अपने जीवन काल में जितनी बार मतदान करते है, उससे कहीं 10 गुना अधिक पौधारोपण भी करें। तीज त्यौहारों पर भी प्लांटेशन करें एवं शादी-विवाह या अन्य कोई भी कार्यक्रम उनके यहां परिवार में संपन्न होता है तो उसकी याद में एक पौधारोपण जरूर करें, यही पौधा आपके यहां बारिश करवाएगा आपको गर्मी से भी बचाएगा और आपकों शुद्ध ऑक्सीजन के साथ—साथ औषधि भी देगा। उन्होंने ओषधिय पौधों के महत्व के बारे में बताया कि कोरोना काल में अगर हम सब बचे हैं तो सिर्फ और सिर्फ इन्ही ओषधियों से बचे हैं जो हमारा पुरातन इतिहास रहा है।

बाढ़ में खत्म हुआ परिवार, तीन दिन तक पेड़ पर बैठ रहे :—
पर्वतारोही दल के लीड़र अवध बिहारी लाल ने बताया कि वे उत्तरप्रदेश के लखीमपुर जिले के दोहरारा गांव निवासी है। 30 जुलाई 1980 में लखीमपुर में आई बाढ़ में उनका पूरा परिवार खत्म हो गया था। उस समय वे 13 वर्ष के थे। उस दौरान वे तीन दिन तक पेड पर बैठे रहे थे, तब सेना के हेलीकॉप्टर से आए जवानों ने उनकी जान बचाई। इसके बाद अवध बिहारी लाल ने पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का लक्ष्य मान लिया तथा उसी समय से पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य करने घर से निकल गए। दल के सदस्य लखनऊ निवासी जितेन्द्र प्रताप ने बताया कि अवध बिहारी लाल के साथ वह 11 वर्ष की आयु में 1955 में जुडे थे। उन्होंने बताया कि भारत सहित अन्य 11 देशों की पैदल यात्रा कर 14 करोड 50 लाख पौधे लगाए जा चुके है। उनके दल में महेन्द्र प्रताप और गोविंद नंद, विजय शंकर सहित 20 सदस्य है। उन्होंने बताया कि सभी सदस्यों ने देह दान कर रखा है तथा पर्यावरण संरक्षण, बेटी—बचाओं, बेटी पढ़ाओं का संदेश रास्ते में मिलने वाले युवाओं को दे रहे है। दल के सदस्य सीकर में तीन दिन का भ्रमण करने के बाद चूरू के लिए रवाना होंगे, जहां आमजन से मिलकर सामाजिक संदेशों एवं पर्यावरण के लिए किए संकल्पों की जानकारी देंगे।

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