Punjab-Haryana High Court: हरियाणा से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। बता दे की पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट (Punjab-Haryana High Court) ने हरियाणा सरकार के उस रिलीविंग आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसके तहत 60 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता से पीड़ित एक अधिकारी को सेवा से मुक्त किया गया था।
23 जुलाई 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध
अधिक जानकारी के लिए बता दे की जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ (Punjab-Haryana High Court) की अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ पांच फरवरी 2026 को जारी आदेश की कार्यवाही अगली सुनवाई तक प्रभावी नहीं होगी। मामला अब 23 जुलाई 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है और इसे समान प्रकृति के अन्य प्रकरण के साथ सुना जाएगा।
रिलीविंग आदेश को चुनौती
अधिक जानकारी के लिए बता दे की याचिका में डेयरी सुपरवाइजर से पदोन्नत होकर डिप्टी जनरल मैनेजर बने विशंभर सिंह ने अपने रिलीविंग आदेश को चुनौती दी है। उनका कहना है कि वे 60 प्रतिशत स्थायी लोकोमोटर दिव्यांगता (पोस्ट पोलियो रेजिडुअल पैरालिसिस) से ग्रस्त हैं और विधिवत जारी दिव्यांगता प्रमाणपत्र के आधार पर वे ‘बेंचमार्क दिव्यांग’ श्रेणी में आते हैं।
वर्ष 1998 में नियुक्ति के बाद उनके सेवा रिकार्ड को निष्कलंक बताया गया है और वर्ष 2021 में उन्हें पदोन्नति भी मिली थी। याचिकाकर्ता (Punjab-Haryana High Court) के अधिवक्ता ने दलील दी कि हरियाणा सरकार ने 31 जनवरी 2006 के निर्देशों के माध्यम से शारीरिक रूप से दिव्यांग कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष की थी।
