I.D.F.C फर्स्ट बैंक घोटाले की जांच से पता चला है कि मुख्य आरोपी व्यक्तियों ने कई मुखौटा कंपनियों का गठन करके विभिन्न खातों में अवैध रूप से सरकारी धन हस्तांतरित किया। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि इसे सरकारी विभागों के खातों से इन फर्जी कंपनियों के खातों में अनधिकृत रूप से स्थानांतरित किया गया था। इन कंपनियों में आरएस ट्रेडर्स, कैपको फिनटेक सर्विसेज, एसआरआर प्लानिंग गुरुज प्राइवेट लिमिटेड और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट शामिल हैं।
8 विभागों के 12 बैंक खातों की संलिप्तता
विजीलैंस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ए.सी.बी.) की ए.डी.जी.पी. चारू बाली ने कहा कि गत 23 फरवरी को एस.वी. एंड ए.सी.बी. थाना पंचकूला में आई.डी.एफ. सी. फर्स्ट बैंक और ए. यू. स्मॉल फाइनेंस बैंक के अज्ञात कार्मिकों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। अब तक की जांच में 8 विभागों के 12 बैंक खातों की संलिप्तता सामने आई है जिनमें से 10 खाते आई.डी.एफ.सी. फर्स्ट बैंक सैक्टर-32 चंडीगढ़ और 2 खाते ए. यू. स्मॉल फाइनेंस बैंक में संचालित थे। इस मामले में 16 स्थानों पर गहन छापेमारी की गई है। कुछ स्थानों से वीडियो फुटेज भी ली गई है।
100 से अधिक बैंक खातों पर डेबिट फ्रीज
अब तक जांच एजेंसी द्वारा 100 से अधिक बैंक खातों पर डेबिट फ्रीज लगाने का अनुरोध भेजा जा चुका है। जांच में पता चला है कि अब तक 8 सरकारी विभागों में अनधिकृत लेनदेन का पता चला है। अब तक की जांच में कई सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों की संलिप्तता की भी पहचान की गई है। सत्यापन के बाद उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, 10 संपत्तियों की पहचान की गई है, जिनके बारे में तार्किक रूप से संदेह है कि उन्हें अपराध की आय से खरीदा गया है।
आरोपियों में बैंक और सरकारी कर्मचारी शामिल हैं।
मामले में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें 6 बैंक कर्मचारी, 4 निजी व्यक्ति और 1 सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। 10 आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि एक पुलिस हिरासत में है। जांच के दौरान अब तक 16 स्थानों पर गहन तलाशी ली गई है। इस दौरान संपत्तियों की खरीद से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इसके अलावा, साइबर फॉरेंसिक लैब की मदद से 25 से अधिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की जा रही है। 6 वाहनों को भी जब्त किया गया है, जिन पर तार्किक रूप से अपराध की आय से खरीदे जाने का संदेह है। यह भी पता चला है कि बैंक रिकॉर्ड में नकली डेबिट मेमो तैयार करके या बिना किसी वैध डेबिट मेमो/चेक के पैसे ट्रांसफर किए गए थे। राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अनुसार, मामले की जांच चल रही है और आने वाले समय में और अधिक महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है।
