Comrade Hetram Beniwal passes away : राजस्थान की राजनीती का चर्चित चेहरा दुनिया को अलविदा कह गया है। 16 अक्टूबर 1932 को जन्मे हेतराम बेनीवाल ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत वामपंथी विचारधारा से की। उन्होंने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के टिकट पर 1967 में संगरिया विधानसभा क्षेत्र से पहला चुनाव लड़ा। बता दे की राजनीति और किसान-मजदूर आंदोलनों का बड़ा चेहरा रहे माकपा के कद्दावर नेता एवं पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल का 23 फरवरी की रात निधन हो गया। 94 वर्षीय बेनीवाल ने श्रीगंगानगर के टांटिया अस्पताल में रात 10:58 बजे अंतिम सांस ली। कामरेड बेनीवाल की सबसे बड़ी ताकत उनकी बुलंद और बेबाक आवाज थी। वे बिना माइक के भी हजारों की भीड़ को घंटों संबोधित कर लेते थे।
तीन दिन पहले हॉस्पिटल में हुए भर्ती
जानकारी के लिए बता दे की तीन दिन पहले हीमोग्लोबिन की कमी के कारण हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे। ब्लड ट्रांसफ्यूजन के बाद उन्हें हैवी निमोनिया हो गया, जिससे उनकी हालत बिगड़ती चली गई। सोमवार रात 12:30 बजे उनका पार्थिव शरीर उनके निवास 8 एलएनपी ले जाया गया।
आज होगा अंतिम संस्कार
संगरिया क्षेत्र के पुनर्गठन के बाद जब सादुलशहर विधानसभा क्षेत्र अस्तित्व में आया, तब उन्होंने 2004 में अंतिम बार चुनाव लड़ा और सक्रिय चुनावी राजनीति को विराम दिया। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार शाम 4 बजे पैतृक गांव 8 एलएनपी में किया जाएगा।
सरकारों को निर्णय बदलकर झुकने पर मजबूर कर देते थे
1977 में टिकट नहीं मिलने के कारण वे चुनाव मैदान में नहीं उतरे, लेकिन जनसंघर्षों से दूरी नहीं बनाई। वर्ष 1990-91 में वे संगरिया विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। हालांकि विधानसभा भंग होने के कारण उनका कार्यकाल करीब ढाई वर्ष ही रहा।
जनसंघर्षों से निकले इस जननेता का राजनीतिक सफर छह दशकों से अधिक समय तक सक्रिय रहा। किसानों-मजदूरों लिए आंदोलन कर दो बार सरकारों को निर्णय बदलकर झुकने पर मजबूर कर दिया था।
अधिक जानकारी के लिए बता दे की 1971-72 में आईजीएनपी (इंदिरा गांधी नहर परियोजना) के प्रथम चरण के जमीन आवंटन को लेकर चले आंदोलन में उनकी भूमिका अहम रही। उनके नेतृत्व में चले आंदोलनों के चलते तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया की सरकार को निर्णयों में बदलाव करना पड़ा था।
