IAS Shubham Chaudhary: 2014 बैच के आईएएस अधिकारी शुभम चौधरी को प्रतापगढ़ का नया जिला कलेक्टर नियुक्त किया गया है। वह पहले बागवानी आयुक्त, जयपुर के रूप में कार्यरत थीं।
डॉ. अंजलि राजोरिया को संयुक्त सचिव, गृह विभाग, जयपुर के रूप में तैनात किया गया है। संयुक्त सचिव डॉ. धीरज कुमार सिंह ने यह आदेश जारी किया है।
सरकार ने किया था 65 IAS का तबादला
अधिक जानकारी के लिए बता दे की बीते दिन राजस्थान सरकार ने 65 आई. ए. एस. अधिकारियों के स्थानांतरण और नियुक्ति आदेश जारी किए हैं।
कार्मिक विभाग द्वारा जारी आदेशों में प्रतापगढ़ जिले के लिए नई नियुक्ति की गई है।
जानिए कौन IAS शुभम चौधरी?
चौधरी राजस्थान कैडर के 2014 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।
उनका जन्म 25 अगस्त 1986 को हुआ था और वे मूल रूप से दिल्ली की रहने वाली हैं।
उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली में पूरी की और फिर उच्च शिक्षा के लिए पोलैंड चली गईं, जहाँ से उन्होंने अर्थशास्त्र में एमए किया।
उन्होंने तीसरे प्रयास में यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की और 2014 में आईएएस सेवा में प्रवेश किया।
आईएएस अधिकारी बनने से पहले उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र में काम किया।
कई जिलों में संभाला है कलेक्टर का पदभार
आपको जानकारी के लिए बता दे की शुभम चौधरी राजस्थान के कई जिलों में कलेक्टर रहे हैं। इनमें राजसमंद, सवाई माधोपुर, सिरोही, कोटपुतली-बहरोड़ और डूंगरपुर जैसे जिले शामिल हैं।
इसके अलावा उन्होंने तीन से चार जिलों में जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में भी काम किया है।
एक सख्त प्रशासनिक अधिकारी के रूप में जानी जाने वाली, शुभम चौधरी अपने सख्त प्रशासनिक रवैये और पारदर्शी कार्य शैली के लिए जानी जाती हैं।
वह अपने काम को लेकर बहुत गंभीर हैं और उन्हें अपने काम में कोई राजनीतिक हस्तक्षेप पसंद नहीं है।
इसके कारण उनके करियर में कई बार तबादले हुए, लेकिन हर जगह उन्होंने अपनी मजबूत प्रशासनिक पकड़ साबित की है।
लगभग 10 से 12 वर्षों के अपने प्रशासनिक कार्यकाल में, शुभम चौधरी का 14 से 16 बार तबादला किया जा चुका है।
हालांकि, बार-बार तबादलों के बावजूद, उन्होंने हर जिम्मेदारी को प्रभावी तरीके से संभाला और प्रशासनिक प्रणाली में सुधार लाने में अपनी भूमिका निभाई।
इस वजह से रहती है चर्चा में
बता दे की अक्सर शुभम चौधरी को तेजी से निर्णय लेने वाले अधिकारी के रूप में जाना जाता है। वे प्रशासन में पारदर्शिता और अनुशासन को प्राथमिकता देते हैं।
जहां भी उन्हें तैनात किया गया, उन्होंने व्यवस्था में सुधार और कामकाज में सुधार पर विशेष ध्यान दिया, जिसके कारण वह लगातार चर्चा में रहती हैं।
