Mustrad Price Hike : अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण खाद्य तेलों की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे शेखावाटी सहित राज्य के सरसों उत्पादक किसानों को सीधा लाभ हो रहा है।
मंडियों में सरसों का दाम समर्थन मूल्य से ऊपर सात हजार रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है, जिससे किसानों के लिए राहत का माहौल है।
साथ ही, समर्थन मूल्य से अधिक कीमत होने से सरकारी खरीद एजेंसी की चिंता बढ़ गई है। केवल एक महीने में रिकॉर्ड वृद्धि के कारण, किसानों का रुझान समर्थन मूल्य पर बेचने की ओर कम है।
किसानों का कहना है कि लंबे समय के बाद समर्थन मूल्य से ज्यादा दाम मिलने से राहत मिली है
उल्लेखनीय है कि जिले में सरसों की खरीद 1 अप्रैल से 6,200 रुपये के समर्थन मूल्य पर और चना 5875 रुपये प्रति क्विंटल पर शुरू की है।
व्यापारियों के अनुसार, आमतौर पर फसल के समय कीमतें कम रहती हैं, लेकिन इस बार फसल के बाद सरसों के दाम बढ़ गए हैं।
सीकर सहित राज्य की कई मंडियों में सरसों की औसत कीमत 6500 से 7000 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि पिछले महीने तक सरसों की कीमत 5400-5800 रुपये प्रति क्विंटल तक बताई जा रही थी।
राज्य में रबी सीजन के दौरान औसतन 70 लाख टन सरसों का उत्पादन होता है, सीकर, झुंझुनू, भरतपुर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, अलवर जिलों में सरसों का सबसे अधिक उत्पादन होता है, जो देश में खपत का 40-45% है।
व्यापारियों के अनुसार, मध्य पूर्व में तनाव के कारण खाद्य तेलों की आपूर्ति शकुछ असर देखने को मिल रह है।
बता दे की इंडोनेशिया से पाम तेल, मलेशिया से पाम तेल, अर्जेंटीना, ब्राजील से सोयाबीन तेल, यूक्रेन और रूस से सूरजमुखी तेल का आयात किया जाता है।
पिछले कई दिनों से समुद्री मार्गों पर जोखिम और बीमा लागत बढ़ने के कारण आयात महंगा हो गया है।
इसके कारण आवश्यकता के अनुसार खाद्य तेल का आयात बंद हो गया है और घरेलू तेल, विशेष रूप से सरसों की मांग बढ़ गई है।
होटल और रेस्तरां में भी सरसों के तेल का उपयोग बढ़ गया है। कारोबारियों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बना रहा तो कीमतें और बढ़ सकती हैं
