Rajasthan Millionaire Didi: राजस्थान अब महिला सशक्तिकरण का एक नया उदाहरण स्थापित कर रहा है।
गाँव की महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि अब “लखपति दीदी” से आगे बढ़कर “करोड़पति दीदी” बनने की तैयारी कर रही हैं।
” यही कारण है कि मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राजीविका मॉडल को महिला सशक्तिकरण के लिए एक आदर्श बताया।
बुधवार को सरकारी सचिवालय में आयोजित राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजवीका) की 21वीं कार्यकारी समिति की बैठक में महिलाओं की आर्थिक ताकत को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
बैठक में साफ संदेश दिया गया कि अब सिर्फ योजना बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि गांव की महिलाओं को करोड़ों रुपये के कारोबार से जोड़ने की दिशा में ठोस काम किया जाएगा।
राजीविका के माध्यम से राज्य की 51 लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों में शामिल होकर आर्थिक रूप से मजबूत हुई हैं।
बैठक में बताया गया कि राजस्थान महिला निधि ने 850 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण वितरित किया, लेकिन इसके बावजूद एनपीए 2 प्रतिशत से कम रहा।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए जा रहे उत्पादों को अब बड़े बाजार से जोड़ा जाएगा।
इसके तहत मॉल, पर्यटन स्थलों, दुकानों और अधिक भीड़भाड़ वाले स्थानों पर इन उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए एक रणनीति तैयार की जाएगी।
सरकार का मानना है कि अगर गांव की महिलाओं को सही बाजार और ब्रांडिंग मिलती है, तो वे बड़े पैमाने पर व्यवसाय कर सकती हैं।
‘लखपति दीदी’ के बाद अब लक्ष्य ‘मिलियनेयर दीदी’ है।
बैठक का सबसे चर्चित मुद्दा “करोड़पति दीदी” की अवधारणा थी। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे लखपति दीदियों की संख्या तेजी से बढ़ाएं और ऐसी कार्य योजना तैयार करें ताकि महिलाएं लाखों की नहीं, बल्कि करोड़ों की आय तक पहुंच सकें।
इसके साथ ही पहले से ही लाभान्वित महिलाओं को निरंतर मार्गदर्शन और प्रशिक्षण प्रदान करने पर भी जोर दिया गया ताकि वे अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सकें।




