Jamnagar-Amritsar Greenfield Expressway : राजस्थान के लोगों को जल्द एक बड़ा तोहफा मिलने वाला है। बता दे की जामनगर-अमृतसर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे राजस्थान में एक प्रमुख संपर्क परियोजना है, जो राज्य के कई प्रमुख जिलों को जोड़ते हुए औद्योगिक और आर्थिक विकास को एक नई दिशा दे सकती है।
स्तावित एक्सप्रेसवे की शुरुआत दौसा-लालसोट एक्सप्रेसवे के इंटरचेंज पॉइंट अरण्य कलां से होगी. यहां से यह ग्रीन कॉरिडोर जयपुर के दक्षिणी हिस्से से गुजरते हुए आगे बढ़ेगा और टोंक रोड पर जयपुर रिंग रोड से इसकी दूरी लगभग 9 से 10 किलोमीटर रहेगी.
400 किलोमीटर की दुरी से जुडेंगें कई जिले
400 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे सात जिलों-जयपुर, टोंक, अजमेर, ब्यावर, जोधपुर, बालोतरा और बाड़मेर को जोड़ेगा। अंत में, इसे बालोतरा में पटौ खुर्द के पास मुख्य एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा। इससे राज्य के पश्चिमी और मध्य भागों के बीच संपर्क काफी मजबूत होगा।
जयपुर जिले में यह एक्सप्रेसवे कोटखावदा, चाकसू, वाटिका, तूंगा, रेनवाल मांझी, फागी, मौजमाबाद, दूदू और साखून सहित 200 से अधिक गांवों से होकर गुजरेगा.
इसका क्षेत्रफल 110 वर्ग किलोमीटर है। इस परियोजना के तहत जयपुर-टोंक और जयपुर-अजमेर राजमार्ग को सीधे जोड़ा जाएगा।
यह पुष्कर-मेडा रोड, एनएच-25 (बाड़मेर-ब्यावर) और एनएच-62 (पिंडवाड़ा) को भी जोड़ेगा
वर्तमान में, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से बालोतरा या पचपदरा जाने वाले वाहनों को जयपुर, अजमेर, ब्यावर और जोधपुर जैसे व्यस्त मार्गों से गुजरना पड़ता है, जिसमें 10 घंटे से अधिक का समय लगता है।
नए ग्रीन कॉरिडोर के निर्माण से दूरी लगभग 100 किलोमीटर कम हो जाएगी, जिससे यात्रा तेज और आसान हो जाएगी।
यह परियोजना विशेष रूप से पचपदरा रिफाइनरी और बाड़मेर क्षेत्र के औद्योगिक विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
एनएचएआई द्वारा इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है।
मंजूरी मिलते ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित जिलों के कलेक्टरों को दी जाएगी।
प्रशासनिक स्तर पर, परियोजना को तेजी से पूरा करने की योजना है।
CM ने दिए तेजी के निर्देश
राज्य सरकार भी इस परियोजना को प्राथमिकता दे रही है। भजन लाल शर्मा की हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रभावित गांवों में सर्वेक्षण का काम शुरू कर दिया गया है और किसानों को उचित मुआवजा देने की तैयारी की जा रही है।
पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए, इस एक्सप्रेसवे को ग्रीन कॉरिडोर के रूप में डिजाइन किया जा रहा है, जिसमें वन्यजीव क्रॉसिंग और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण शामिल होगा।
यह परियोजना न केवल यातायात को आसान बनाएगी बल्कि जयपुर और पूरे मारवाड़-शेखावाटी क्षेत्र के विकास को एक नई गति भी देगी और राजस्थान को देश के प्रमुख आर्थिक गलियारों से मजबूती से जोड़ेगी।
