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विश्व विख्यात मातेश्वरी राष्ट्रीय स्तर महिला, पुरुष पहलवानों का कुश्ती दंगल संपन्न

पचलंगी में 2 अक्टूबर गांधी जयंती के उपलक्ष में एवं देवनारायण मेला में आस्था का उमड़ा जन सैलाब

दिल्ली, हरियाणा, रोहतक, पंजाब सहित अन्य राज्यों से आए महिला एवं पुरुष पहलवानों ने देर रात तक दिखाए कुश्ती दंगल में दाव पेच

उदयपुरवाटी. क्षेत्र की ग्राम पंचायत पचलंगी में श्री मातेश्वरी कुश्ती दंगल में महिलाओं एवं पुरुष पहलवानों ने देर रात तक कुश्ती दंगल प्रतियोगिता में अपने दाव पेच लगाए। मातेश्वरी मेला कमेटी के पूर्व प्रधान मदनलाल भावरिया ने बताया कि मातेश्वरी कुश्ती दंगल प्रतियोगिता का आयोजन हंसनाला बालाजी धाम के महंत मोनी महाराज की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। मेला कमेटी द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी घर-घर जाकर कुश्ती दंगल में पहुंचने के लिए मेला कमेटी के सदस्यों ने पीले चावल बांटे। पचलंगी मेला कमेटी के सदस्य मदनलाल बावरिया ने बताया कि मातेश्वरी नवयुवक मंडल के तत्वाधान में 1 मई 1979 में इस कुश्ती मेले का शुभारंभ किया गया था।

यह कुश्ती दंगल मेला शेखावाटी में ही नहीं अपितु देश एवं विदेश में प्रसिद्ध है। मातेश्वरी कुश्ती दंगल में पूर्व विधायक शिवकरण चौधरी सहित वर्तमान तथा पूर्व जनप्रतिनिधि मंचस्थ रहे। जिनका मातेश्वरी मेला कमेटी के द्वारा माला एवं साफा पहनकर स्वागत किया गया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि उदयपुरवाटी उपखंड मुख्यालय से पचलंगी मातेश्वरी कुश्ती दंगल परिसर की दूरी करीब 35 किलोमीटर है। संपूर्ण प्रचलंगी गांव काटली नदी के तट पर बसा हुआ है। कटली नदी खंडेला की पहाड़ियों से शुरू होकर चुरू जिले के साखणताल तक जाती है। लेकिन मिट्टी का कटाव पचलंगी से ही शुरू होता है। साथ ही तीन तरफ से सीकर जिले की सीमा से सटा हुआ गांव है ग्रामीणों की जानकारी के अनुसार पहाड़ी पर स्थित श्री महाकंवरी शक्ति के दादा पंचायन्जी के नाम पर गांव का नाम पचलंगी हुआ। पचलंगी में नृसिंह लीला का मंचन अश्वनी मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को प्रतिवर्ष रात्रि में किया जाता है। गांव का मुख्य मार्ग द्वार सीकर-दिल्ली स्टेट हाईवे पर शेखावाटी का सुप्रसिद्ध झड़ाया बालाजी मंदिर स्थित है।

यहां मंदिरों के प्रति भक्तों की गहरी आस्था है। साथ ही गांव की पश्चिम दिशा में काटली नदी के तट पर शिव गोरक्षक धाम, शिव व बुंगला वाले बालाजी का मंदिर स्थित है। उत्तर दिशा में झरनानाथ महाराज का स्थान है। दक्षिण दिशा में बुरकड़ा बालाजी मंदिर है। गांव के मध्य पहाड़ी पर स्थित महाकंवरी शक्ति, भेरुजी एवं रामदेव मंदिर स्थित है। ग्रामीणों के अनुसार आराध्य देव गोपीनाथजी, गोपाल एवं जानकी वल्लभ, भोजवाला बालाजी मंदिर स्थित है। मातेश्वरी कुश्ती दंगल झुंझुनू जिले का 44 व तथा नीमकाथाना जिले का प्रथम विश्वविख्यात कुश्ती दंगल मेले का आयोजन हुआ। कुश्ती दंगल में दिल्ली रोहतक, हरियाणा, पंजाब, यूपी, बिहार, नेपाल सहित अन्य राज्यों से आए महिला एवं पुरुष पहलवानों ने अपने दावा पेच लगाते हुए एक दूसरे पहलवान को पटखनी दी। कुश्ती दंगल प्रतियोगिता में विजेता तथा उपविजेता को नगद पुरस्कार, प्रशस्ति पत्र एवं मोमेंटो देकर सम्मान किया गया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि महिला कुश्ती दंगल वर्ष 2000 से प्रारंभ हुआ। जिसमें देश-विदेश के प्रसिद्ध अखाड़े की महिला पहलवान प्रतिवर्ष पचलंगी कुश्ती दंगल में अपना दाव पेच लगाकर दमखम दिखाते हैं।

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