झुंझुनू जिला कलेक्ट्रेट पर हुआ एक विरोध प्रदर्शन चर्चा का विषय बन गया। दरअसल जिले के एक गांव के नाम को बदलने को लेकर पूरा यह विवाद सामने आया है और नाम बदलने के विरोध में आए लोगों ने झुंझुनूं कलेक्टर और स्थानीय विधायक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान जिन शब्दों का प्रयोग किया उनको लेकर चर्चाओं का दौर झुंझुनू में चला रहा है क्योंकि यह मामला एक गांव के नाम बदलने को लेकर था लेकिन नारो में जिन शब्दों का प्रयोग कलेक्टर और विधायक के लिए किया गया उसको लेकर भी लोगों में अलग-अलग चर्चाएं सुनने को मिल रही हैं।
कई लोगों ने इसे विरोध प्रदर्शन का अधिकार बताया तो कई लोगों का कहना था कि इस प्रकार की अमर्यादित भाषा का प्रयोग उचित नहीं था क्योंकि जो विषय था वह अलग था इसमें कलेक्टर तक को चोर बता देना सही नहीं था। ऐसी अलग अलग लोगो की राय निकलकर सामने आई है।
दरअसल बता दें कि झुंझुनूं जिले के इस्लामपुर गांव का नाम बदलकर श्रीरामपुर किए जाने की संभावित तैयारी के विरोध में सैकड़ों ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव का नाम बदलने की कवायद से क्षेत्र का सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है और सामाजिक माहौल प्रभावित हो सकता है। ग्रामीणो का कहना है कि इस्लामपुर गांव आजादी से पहले का बसा हुआ है और तत्कालीन नवाब बहलोल खान ने इसका नाम इस्लामपुर रखा था। करीब 15 हजार की आबादी वाले इस गांव में लगभग साढ़े आठ हजार मतदाता हैं तथा यह पटवार और पंचायत मुख्यालय भी है। वहीं विधायक राजेंद्र भांबू ने कहा कि गांव का नाम बदलने की मांग लंबे समय से उठ रही थी और स्थानीय लोगों की मांग पर उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर नाम परिवर्तन का प्रस्ताव भेजा था। मुख्यमंत्री कार्यालय के उपसचिव जयप्रकाश नारायण ने जिला कलेक्टर से इस संबंध में तथ्यात्मक रिपोर्ट और टिप्पणी मांगी है। रिपोर्ट में ग्रामसभा प्रस्ताव, नाम परिवर्तन के कारण, आबादी और भौगोलिक स्थिति सहित विभिन्न बिंदुओं की जानकारी मांगी गई है। राजस्व विभाग भी स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटा रहा है। रिपोर्ट सरकार को भेजे जाने के बाद ही गांव का नाम बदलने अथवा यथावत रखने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। ब्यूरो रिपोर्ट झुंझुनू






