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राजस्थान का रेगिस्तान धधक रहा! अगर सुपर अल नीनो बना तो अगले 10 दिन बन सकते हैं आफत?

राजस्थान वेदर अपडेट 2026: सुपर अल नीनो और बढ़ती गर्मी की तस्वीर

Rajasthan Heatwave Update: राजस्थान इन दिनों आग के गोले में बदलता नजर आ रहा है. मई खत्म होने से पहले ही जून जैसी झुलसा देने वाली गर्मी पड़ रही है. जयपुर से लेकर श्रीगंगानगर, बीकानेर, चूरू और बाड़मेर तक सूरज मानो कहर बरसा रहा है. कई शहरों में तापमान 46 से 48 डिग्री के बीच पहुंचने की चेतावनी दी गई है. सड़कें तवे की तरह तप रही हैं, हवा में लू के थपेड़े हैं और दिन के समय बाहर निकलना किसी सजा से कम नहीं लग रहा.

हालात सिर्फ मैदानी इलाकों में ही खराब नहीं हैं. माउंट आबू जैसे ठंडे माने जाने वाले इलाकों में भी गर्मी लोगों को परेशान कर रही है. दिन चढ़ते ही बाजार सूने पड़ जाते हैं और लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं. ऐसा लग रहा है मानो धरती ही नहीं, रेगिस्तान का पाताल भी धधक रहा हो.

150 साल पुराने खतरे जैसी आशंका

क्या इस बार राजस्थान में गर्मी पुराने रिकॉर्ड तोड़ सकती है? मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो साल 2026 में ‘सुपर अल नीनो’ बनने की संभावना जताई जा रही है. अगर ऐसा हुआ तो 1876 जैसी भयावह स्थिति पैदा हो सकती है, जब भीषण गर्मी और सूखे ने तबाही मचाई थी. तेजी से बढ़ता वैश्विक तापमान अब पर्यावरण वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता बन चुका है.

राजस्थान में हीटवेव का असर लगातार बढ़ता जा रहा है. जयपुर, कोटा, जोधपुर, अजमेर और अलवर जैसे शहरों में दोपहर के वक्त सड़कें लगभग खाली नजर आती हैं. स्कूलों की छुट्टियां शुरू होते ही लोग माउंट आबू और पहाड़ी इलाकों का रुख कर रहे हैं, लेकिन वहां भी राहत सीमित होती दिख रही है.

जयपुर से बाड़मेर तक गर्मी का कहर

राजधानी जयपुर में दिन के समय लू लोगों को झुलसा रही है. बीकानेर और चूरू में हालात सबसे ज्यादा खराब बताए जा रहे हैं. बाड़मेर और जैसलमेर में रेतीली हवाएं आग जैसी महसूस हो रही हैं. कई इलाकों में पानी का संकट भी गहराने लगा है. गांवों में टैंकरों पर निर्भरता बढ़ रही है तो शहरों में बिजली कटौती लोगों की मुश्किलें और बढ़ा रही है.

अस्पतालों में डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और बुखार के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. पशु-पक्षी भी बेहाल हैं. तालाब और छोटे जलस्रोत सूखने लगे हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में चिंता बढ़ गई है.

आखिर क्या है सुपर अल नीनो?

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक अल नीनो एक प्राकृतिक मौसमी प्रक्रिया है, जो प्रशांत महासागर में हर कुछ सालों के अंतराल पर बनती है. सामान्य स्थिति में एशिया की तरफ समुद्र का पानी ज्यादा गर्म रहता है और दक्षिण अमेरिका की तरफ ठंडा. इसी संतुलन की वजह से भारत में मानसून सक्रिय रहता है.

लेकिन जब अल नीनो आता है, तब समुद्र का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है और हवाओं का पैटर्न बिगड़ने लगता है. इसका असर भारत के मौसम पर सीधा पड़ता है. मानसून कमजोर हो सकता है और गर्मी खतरनाक स्तर तक पहुंच सकती है.

2023 में भी अल नीनो का असर देखने को मिला था, जब राजस्थान समेत कई राज्यों में तापमान 45 से 48 डिग्री तक पहुंच गया था. अब वैज्ञानिकों को आशंका है कि 2026 में हालात उससे भी ज्यादा गंभीर हो सकते हैं. अगर ‘सुपर अल नीनो’ बना तो इसे पिछले 150 सालों की सबसे ताकतवर मौसमी घटनाओं में गिना जा सकता है.

अगले 10 दिन क्यों भारी पड़ सकते हैं?

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगर गर्म हवाओं का यही दौर जारी रहा और मानसून की रफ्तार कमजोर पड़ी, तो राजस्थान में अगले कुछ दिन बेहद मुश्किल हो सकते हैं. भीषण गर्मी के साथ पानी का संकट गहरा सकता है. खेती पर असर पड़ सकता है और ग्रामीण इलाकों में सूखे जैसे हालात बनने का खतरा बढ़ सकता है.

फिलहाल राजस्थान तप रहा है… और सवाल यही है कि क्या आने वाले दिन इस गर्मी को और खतरनाक बना देंगे?

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