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नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को सात वर्ष का कारावास

पुलिस थाना बुहाना का मामला

विशेष न्यायाधीश लैंगिक अपराधो से बालको का संरक्षण अधिनियम तथा बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम के न्यायाधीश सुकेश कुमार जैन द्वारा बुधवार को दिये निर्णय में एक नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में कुलदीप पुत्र दलबीर मेघवाल निवासी उरीका पुलिस थाना सूरजगढ़ को सात वर्ष का साधारण कारावास व एक हजार रूपये अर्थदण्ड से दण्डित किया है जबकि इस मामले में दूसरे आरोपी धर्मेन्द्र उर्फ सोनू पुत्र निहालाराम मेघवाल निवासी धुलवा पुलिस थाना बुहाना को संदेह का लाभ देकर सभी आरोपो से बरी कर दिया। मामले के अनुसार पीडि़ता ने 30 मार्च 2016 को एक रिपोर्ट पुलिस थाना बुहाना पर दी कि 25 जून 2015 को कुलदीप जो उनके घर पर निर्माण कार्य में मजदूरी पर कार्य करता था, उसे बहला-फुसलाकर, डरा-धमकाकर एक डोरा ताबिज दिया व उसके बाद मोबाईल पर गलत बात व शारीरिक सम्बन्ध के लिये धमकाने लगा तथा 5 जुलाई 2015 को रात्रि के समय करीब 1:30 बजे कुलदीप ने मोबाईल से फोन पर पानी लाने को कहा और जब वह पानी पिलाने गयी तो कुलदीप ने जबरन उसने दुष्कर्म किया तथा उसके बाद 10 सितम्बर 2015 को जब वह धूलवा स्थित स्कूल में पढऩे जा रही थी तो उसके पड़ौसी धर्मेन्द्र ने भी उसे धमकी दी कि उसे कुलदीप के साथ तुम्हारे शारीरिक सम्बन्ध का पता है व दूसरे दिन प्रात: 3:30 बजे के आस-पास घर के पूर्व में स्थित टेणो के नीचेें उससे दुष्कर्म किया आदि। पुलिस ने इस रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर बाद जांच कुलदीप व धर्मेन्द्र उर्फ सोनू के विरूद्ध दुष्कर्म, पोक्सो एक्ट आदि में सम्बन्धित न्यायालय में चालान पेश कर दिया। राज्य सरकार की तरफ से पैरवी करने वाले विशिष्ट लोक अभियोजक लोकेन्द्र सिंह ने इस्तगासा पक्ष की तरफ से 15 गवाहान के बयान करवाये। न्यायाधीश ने पत्रावली पर आई साक्ष्य का बारिकी से विश£ेषण करते हुये उक्त धर्मेन्द्र उर्फ सोनू पुत्र निहालाराम मेघवाल निवासी धुलवा को तो संदेह का लाभ देकर सभी आरोपो से बरी कर दिया जबकि आरोपी कुलदीप को उक्त सजा के साथ-साथ पोक्सो एक्ट में भी उसे और सात वर्ष का साधारण कारावास तथा एक हजार रूपये अर्थदण्ड से दण्डित करते हुये सभी सजाये साथ-साथ भुगतने का आदेश दिया।

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