अलवर के जिला कलक्टर आर्तिका शुक्ला के नवाचार ‘पार्क लाइब्रेरी’ को अब ग्रामीण इलाकों में ले जाने की तैयारी है। इसके लिए जमीन की तलाश ब्लॉक व उपखंड स्तर शुरू हो गई है।
खाली जमीन हो या फिर भवन, जो स्थान उपयुक्त होगा, वहां पार्क लाइब्रेरी (विद्या कुंज) का निर्माण किया जाएगा। इन पुस्तकालयों के आसपास हरियाली विकसित की जाएगी। यदि खाली जमीन है, तो वहां पार्क विकसित किया जा सकता है। प्रशासन इसका खाका तैयार कर रहा है।
जिला कलक्टर के इस नवाचार के तहत शहर के बुद्ध विहार स्थित पार्क में विद्या कुंज नाम से पार्क लाइब्रेरी बनाई गई। इसका उद्घाटन केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने किया था। पार्क के बीचों बीच स्थित इस लाइब्रेरी का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा पारदर्शी कांच से बना है।
इससे पाठक हरियाली के बीच बैठकर पढ़ाई का आनंद ले सकते हैं। लाइब्रेरी के लेकर शहर की विभिन्न संस्थाओं व लोगों ने पुस्तके भी दान की है। इस लाइब्रेरी की पूरे नवाचार को मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास से लेकर कई अधिकारियों ने सराहा।
प्रदेश की नौकरशाही में चर्चा है। इस इसे देखते हुए अब प्रशासन इस नवाचार को कस्बों व गांवों तक ले जाना चाहता है, जिसके लिए जमीन या भवन की जरूरत है। उसी की तलाश के लिए एसडीएम, बीडीओ आदि से प्रशासन संपर्क कर रहा है।
एक अधिकारी का कहना है कि जल्द ही ग्रामीण इलाकों में भी पार्क लाइब्रेरी की खुशखबरी मिलेगी। बुद्ध विहार की तर्ज पर ही पुस्तकालय तैयार होंगे।
देश में भी लागू हो सकता है यह मॉडल
केंद्र सरकार ने देशभर के अधिकारियों से उनके सफल गुड प्रेक्टिस मॉडल और प्रशासनिक सुधारों के अनुभव मांगे हैं। ताकि एक जिले या राज्य में सफल रहे मॉडल को पूरे देश में लागू किया जा सके। विद्या कुंज भी जिला कलक्टर का गुड प्रेक्टिस मॉडल है। अगर इसका चयन हुआ तो पूरे देश में इसे लागू किया जा सकता है।





