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Success Story : खुद का सपना टूटा तो दूसरों को बनाया चैंपियन, खेल के दम पर 125 युवाओं को दिलाई नौकरी

Success Story खुद का सपना टूटा तो दूसरों को बनाया चैंपियन, खेल के दम पर 125 युवाओं को दिलाई नौकरी

अगर इंसान के हौंसले बुलंद हो तो असफलता के बाद भी सफलता के शिखर को चूम सकता है। जिंदगी में कुछ लोग सिर्फ अपने लिए जीते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो दूसरों के सपनों को अपनी जिंदगी का मकसद बना लेते हैं।

ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है रोहतक के शास्त्री नगर (हिसार बाईपास) के रहने वाले राजेश कुमार की। शिक्षा विभाग में डीपीई के पद पर राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल, काहनौर में तैनात राजेश कुमार पिछले 21 सालों से इलाके के युवाओं के लिए किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं। वे बिना एक रुपया फीस लिए रोज शाम को युवाओं को एथलेटिक्स की ट्रेनिंग दे रहे हैं।

राजेश कुमार का खुद का सपना देश के लिए एथलेटिक्स में बड़ा मुकाम हासिल करना था। वे अपनी मेहनत के दम पर नेशनल स्तर तक पहुंचे भी, लेकिन किन्हीं कारणों से उनका इंटरनेशनल खेलने का सपना अधूरा रह गया। राजेश ने इस मायूसी को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बना लिया।

उन्होंने तय किया कि जो मुकाम वह खुद हासिल नहीं कर सके, अब वह इलाके के युवाओं को वहां तक पहुंचाएंगे। इसी संकल्प के साथ उन्होंने साल 2002 में पटियाला (एनआईएस) से स्पोर्ट्स कोचिंग का कोर्स किया और 2005 से मुफ्त में युवाओं को तराशने के मिशन में जुट गए। इसके बाद साल 2010 में उनकी सरकारी नौकरी लगी,

लेकिन उनका यह सेवा भाव आज भी वैसा ही है। राजेश हर रोज शाम ठीक 5 बजे वह मैदान पर पहुंच जाते हैं। फिलहाल वे रोहतक के राजीव गांधी स्टेडियम और मदीना के खेल स्टेडियम में युवाओं को एथलेटिक्स के गुर सिखा रहे हैं।

140 खिलाड़ी नेशनल मेडल व 8 अंतरराष्ट्रीय जीत चुके

राजेश कुमार की इस निःस्वार्थ पाठशाला का असर ऐसा हुआ कि अब तक करीब 2500 युवाओं का जीवन खेल के मैदान के जरिए बदल चुका है। उनके सिखाए बच्चों ने अब तक राष्ट्रीय स्तर पर 140 मेडल जीतकर हरियाणा का नाम चमकाया है। इतना ही नहीं, राजेश कुमार के तराशे हुए 8 हीरे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इनमें दो बड़े नाम शामिल हैं।

सचिन दलालः जिन्होंने साउथ एशियन गेम्स डिस्कस थ्रो में देश के लिए गोल्ड मेडल जीता।

निधिः जिन्होंने साउथ एशियन गेम्स के डिस्कस थ्रो में सिल्वर मेडल हासिल कर तिरंगे का मान बढ़ाया।

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