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विकलांग को भी नही बख्शा ठगों ने

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शिमला[अनिल शर्मा ] एटीएम भी जनता के लिए आफत साबित हो रहे हैं। ग्राम गौरीर निवासी सुनिल देवी पूर्ण रूप से विकलांग है तथा उसके पति घनश्याम शर्मा भी पूर्ण रूप से विकलांग है। दोनो को राज्य सरकार द्वारा प्रतिमाह 500 -500 रू पेन्शन मिलती है। सुनिल की एसबीआई बैंक शिमला के खाते मे पेन्शन आती है। जिससे वो अपना व अपने परिवार का पेट पालते हैं। लेकिन ठगों ने उन्हे भी नही बख्शा। और उनकी पेन्शन को भी खाते से निकाल लिया। सुनिल देवी ने बताया कि उसके मोबाइ्रल पर एक कॉल आया कि मै एसबीआई बैंक शिमला से मेनेजर बोल रहा हूं। आपका एअीएम बन्द हो गया है। आप अपने एटीएम के पिन नम्बर बताओ। तो मैने उसे पिन नम्बर बता दिये। उसी समय मेरे मोबाईल पर 1200 रू निकलने का मैसेज आया। तो मैं हक्की बक्की रह गई। ठगी करने वालों के होसले इतने बुलन्द हें कि वो रोज किसी न किसी को फसाकर खाते से पैसे निकालने मे कामयाब हो जाते हैं। और फिर भोले भाले लोग रोकर रह जाते हैं। लेकिन इन दगाबाजों के आगे सरकारी खुफीया तंत्र भी फैल हो रहा है। ऐसे ही न जाने कितने ही लोगों के पास रोजाना इन ठगों के फोन आते हैं। और उनमे से कुछ लोग इनके चंगुल मे फंस भी जाते हें। ऐसा ही वाक्या पिछले दिनों ग्राम शिमला निवासी विकलांग हंसराज धानक के साथ भी हुआ था। उसे भी इन ठगी करने वालों ने शिकार बनाया था। तथा हजारों रू का चूना लगा दिया था। बेचारे गरीब विकलांग हंसराज ने नरेगा मे ट्राईसाईकिल पर डिब्बों से पानी पिलाकर पैसे जोडे थे कि इन पैसों से अपना छोटा सा अाशियाना बनाउंगा। लेकिन ठगों ने उसका ये सपना पूरा नही होने दिया। ठगी करने वाले अधिकतर ऐसे ही लोगों को अपना शिकार बनाते हें। एक तरफ सरकार सब कुछ ओनलाईन कर रही है वहीं दूसरी तरफ गरीब लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं। लेकिन सरकार इस तरफ कोई ध्यान नही दे रही है। ऐसा ही एक फोन कॉल पिछले तीन दिन से शिमला निवासी कृपाल के पास भी आ रहा था तथा उससे भी एटीएम के नम्बर व पिन नम्बर पूछे गये थे लेकिन गनीमत रही कि जब भी फोन आया कृपाल घर पर नही था। इसी बीच वह किसी काम से बैंक मे चला गया ओर वहां उसने जब इस बारे मे पूछा तो बैंक वालों ने बताया कि किसी को भी फोन पर कोई डिटेल मत बताना। बैंक द्वारा कभी भी फोन से नही पूछा जाता है। इस वजह से कृपाल ठगों के शिकार से बच गया।

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