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शहीद शिशुपाल सिंह की राजकीय सम्मान के साथ की गई अंत्येष्टि

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शहीद के सम्मान में 18 किलोमीटर तिरंगा यात्रा का जगह-जगह पुष्प वर्षा से हुआ स्वागत

सांसद सरस्वती, पूर्व शिक्षा राज्य मंत्री डोटासरा, जिला कलेक्टर चतुर्वेदी सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, हजारों ग्रामीणजन हुये शामिल

सीकर, संयुक्त राष्ट्र मिशन में अफ्रीका के कांगो में प्रदर्शनकारियों के हमले में शहीद हुए जिले के लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र के बगडियाें का बास के सीमा सुरक्षा बल में हैड कांस्टेबल शिशुपाल सिंह बगड़िया की पार्थिव देह रविवार की रात बलारां थाने पहुंची जहां से 18 किलोमीटर की तिरंगा यात्रा के साथ सोमवार को सुबह उनके पैतृक गांव बगडियों का बास पहुंची। इस दौरान तिरंगा यात्रा का ढोलास, खिरवा, डूडवा गांवों में ग्रामीण जनों व स्कूल के बच्चों ने गगनभेदी नारों के साथ पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। घर पहुंचने पर शिशुपाल सिंह की पार्थिव देह को देखकर पूरा परिवार भावुक हो गया। 85 वर्षीय पिता झाबर मल, माता पार्वती देवी, पत्नी शहीद वीरांगना कमला देवी का रो-रो कर बुरा हाल था। पत्नी कमला देवी अपने पति को देखकर वंदे मातरम के नारे लगाने लगी और उन्होंने पति के करीब जाकर उन्हें सैल्यूट किया। घर से अंतिम यात्रा अंत्येष्टि स्थल पहुंची और जहां पर सैना की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑर्नर दिया तथा शहीद के बेटे प्रशांत ने उन्हें मुखाग्नि दी। राज्य सरकार की ओर से पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महरिया ने शहीद की पार्थिव देह पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रृदांजलि दी। सांसद सुमेदानंद सरस्वती, पूर्व शिक्षा राज्यमंत्री एवं लक्ष्मणगढ़ विधायक गोविन्द सिंह डोटासरा, उप जिला प्रमुख ताराचंद धायल सहित जन प्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों ने पुष्प चक्र अर्पित कर शहीद को श्रृदांजलि दी।

परिवार के एक दर्जन सदस्य देश सेवा में ः
शिशुपाल सिंह के परिवार के करीब एक दर्जन सदस्य देश सेवा में कार्यरत है। शिशुपाल सिंह अक्टूबर 1994 में सीमा सुरक्षा बल में भर्ती हुए थे। उनकी वर्तमान में तैनाती 4 मई 2022 को संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत अफ्रीकन देश कांगों में की गई , जहां उनके बुटेम्बों स्थित कैम्प पर हुए हिसंक हमले में 26 जुलाई को वे शहीद हो गये। शिशुपाल सिंह के बडे भाई मदन सिंह बगड़िया सीमा सुरक्षा बल की जैसलमेर स्थित 92वीं बटालियन में डिप्टी कमाण्डेंंट है। बडे भाई मूलसिंह बगड़िया राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) कोलकाता में हवलदार पद पर कार्यरत है। शिशुपाल सिंह का चचेरा भाई रामनिवास बगड़िया सीमा सुरक्षा बल में सहायक उपनिरीक्षक, श्रीपाल बगड़िया केन्द्रीय रिर्जव पुलिस बल में कांस्टेबल हैं। शिशुपाल सिंह का भांजा श्रीराम गढवाल सिपाही के पद पर जम्मू में कार्यरत है।

गांव के युवाओं को देते थे प्रशिक्षण व मार्गदर्शनः
गांव के अध्यापक मनोज कुमार बगड़िया ने बताया कि शिशुपाल सिंह जब भी गांव आते थे तो गांव के युवाओं को कैरियर के बारे में मार्गदर्शन देते रहते थे। वे अपने घर के सामने स्थित खेल मैदान में खेलने वाले युवाओं को खेलों का प्रशिक्षण भी देते थे।

बेटी मेडिकल व बेटा कर रहा है एमबीए ः
शहीद शिशुपाल सिंह बगड़िया की पत्नी कमला देवी सरकारी अध्यापिका है। बडी बेटी कविता एमबीबीएस में अध्यनरत है जबकी बेटा प्रशांत एमबीए कर रहा है। शहीद शिशुपाल की बेटी कविता ने कहा की मेरे पापा ने परिवार से ज्यादा समय अपनी नौकरी को दिया। शिशुपाल की वीरांगना कमला देवी ने कहा- मुझे गर्व है कि मेरे पति ने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में शहादत दी है।

परिवार को कोई समस्या नहीं आने दी जाएगी ः डोटासरा
पूर्व शिक्षा राज्य मंत्री एवं लक्ष्मणगढ़ विधायक गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि राज्य सरकार इस दुःख की घडी में इस परिवार के साथ है। शहीद के परिवार को किसी भी तरीके की कोई समस्या नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि गांव की स्कूल का नामकरण शहीद शिशुपाल सिंह के नाम से करवाने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भिजवाया जायेगा। साथ ही शहीद की बेटी कविता जो डॉक्टर है, जिसकों ध्यान में रखते हुए गांव में पीएचसी खोलने का प्रयास किया जायेगा। पूर्व सैनिक कल्याण बोर्ड अध्यक्ष प्रेम सिंह बाजौर ने शहीद की मूर्ति बनवाने की घोषणा की ।

इस दौरान सीकर सांसद सुमेधानंद सरस्वती, जिला कलेक्टर अविचल चतुर्वेदी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामचन्द्र मुण्ड, सीमा सुरक्षा बल के डीआईजी अर्जुन सिंह राठौड़, लक्ष्मणगढ़ प्रधान मदन सेवदा, पूर्व विधायक धोद गोवर्धन वर्मा, खण्डेला बंशीधर बाजिया, सीकर रतन लाल जलधारी, श्रीमाधोपुर झाबर सिंह खर्रा, नीमकाथाना प्रेमसिंह बाजौर, हरिराम रणवां, महेश शर्मा, पूर्व जिला परिषद के सदस्य जितेन्द्र कारंगा, लक्ष्मणगढ़ के पूर्व चैयरमेन दिनेश जोशी, इन्दिरा चौधरी, शिक्षाविद् दयाराम महरिया, भागीरथ गोदारा, सरपंच प्रतिनिधि महेश कुमार सहित जनप्रतिनिधि, ग्रामीणजन बड़ी संख्या में मौजूद थे।

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