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राज्य उपभोक्ता आयोग ने झुंझुनू जिला आयोग के विवादास्पद अंतरिम आदेश व दण्डात्मक कार्यवाही पर लगायी रोक

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झुंझुनू, राज्य उपभोक्ता आयोग जयपुर ने जिला आयोग झुन्झुनूँ के द्वारा वाद विचारण के दौरान पारित अन्तरिम विवादास्पद आदेश व ऐसे विवादास्पद आदेश के क्रियान्वयन हेतु अपीलार्थीगण के विरुद्ध की जा रही दण्डात्मक कार्यवाही पर सुनवाई के बाद रोक लगाते हुए परिवादी पक्ष को नोटिस जारी किये है।

मामले के अनुसार सखी महिला मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड चनाना के सुपरवाईजर संजेश कुमार निवासी कसेरु व कुमावास दुग्ध बूथ संचालिका सजना देवी ने अधिवक्ता संजय महला व सुनीता महला के जरिये अपील दायर कर बताया कि उनकी कंपनी ने दूध में मिलावट की शिकायतों के चलते दूध देने वाले एक महिला मेम्बर का मिलावटी दूध लेने से मना कर दिया था जिस पर परिवादिया ने 29 अप्रैल को सखी महिला मिल्क कंपनी के विरुद्ध जिला उपभोक्ता आयोग झुन्झुनूँ में परिवाद दायर किया । आयोग ने दिनांक 9 मई को वाद लम्बित रखते हुए अंतरिम आदेश जारी कर दूध लेने वाली कंपनी को आदेश दिया कि परिवादिया से पूर्व की भाँति दूध लेना जारी रखे व पालना रिपोर्ट 07 दिन में आगामी तारीख 15 मई को आयोग के समक्ष पेश की जाए। इसके बाद परिवादिया ने बताया कि कंपनी सखी महिला बूथ कुमावास संचालक ने निर्णय की पालना नहीं कर दूध सप्लाई सेवा बहाल नहीं की है। इस पर जिला आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मील व सदस्य नीतू सैनी ने 20 मई को अवमानना स्वरूप दंडात्मक कार्यवाही शुरू करते हुए कंपनी के सुपरवाईजर संजेश व कुमावास बूथ संचालिका सजना देवी को अभियुक्त के बतौर हाजिर करने हेतु जिला एसपी को जमानती वारंट तस्दीक कराने भेजे व 24 मई को अभियुक्तगण की आयोग के समक्ष उपस्थिति सुनिश्चित करने के आदेश पारित किए । 24 मई को दोनों जब हाजिर हुए तो उन्हे अलग अलग 10 हजार रुपये का बंध पत्र व इसी राशि की जमानत प्रस्तुत करने पर रिहा करने का आदेश जारी हुए।

बहस में अधिवक्ता संजय महला व सुनीता महला ने राज्य आयोग के समक्ष जिला आयोग के 9 मई के आदेश व 20 मई व 24 मई को की गई दण्डात्मक कार्यवाही को चुनौती देते हुए जिला आयोग के निर्णयों को विधि विरुद्ध, मनमाना व भयभीत कर दवाब की कार्यवाही करने वाला बताया।उन्होंने कहा कि आयोग ने अपनी विधिक शक्तिओं का अतिक्रमण किया है। आयोग ने विभिन्न न्यायालयों के प्रतिपादित निर्णयों की अनदेखी की है। बहस में एडवोकेट संजय महला ने कहा कि आयोग ने पीठासीन अधिकारी के साथ साथ विशेषज्ञता की भूमिका के तौर पर दवाब बनाते हुए मिलावटी दूध का संग्रहण करने व जेल भेजने की कार्यवाही करना पूर्णतया विधि द्वारा प्रतिपादित सिध्दांतो के विरुद्ध है । अतः न्याय हित में आयोग द्वारा पारित अंतरिम निर्णय व की जा रही दंडात्मक कार्यवाही पर तुरंत रोक लगाने की मांग की। दोनों दायर मामलो की सुनवाई कर रहे आयोग के चेयरमैन न्यायाधिपति देवेन्द्र कच्छावा व सदस्य अतुल कुमार चटर्जी ने जिला आयोग झुन्झुनूँ के तीनों विवादास्पद फ़ैसलों पर रोक लगाते हुए विपक्षी को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है।

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