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राजस्थान की कैर-सांगरी बन चुकी है देश विदेश की शाही सब्जी

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सांगरी और कोलेस्ट्रोल का है सदा से बैर।
मधुमेह को भी घटाए, साथ मे जो हो कैर।।

झुंझुनूं, कैर-सांगरी ने यूं तो देश-विदेश में शाही सब्जी के तौर पर अपनी पहचान बनाई है, लेकिन इसके औषधीय गुण इसके स्वाद, खुशबू और पहचान से भी कहीं ज्यादा है। राजकीय बीडीके अस्पताल में वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डॉ. महेश माटोलिया बताते हैं कि राजस्थान के मरुस्थलीय भूभाग में बहुतायत से मिलने वाले वृक्ष खेजड़ी के लगने वाली फली सांगरी बतौर सब्जी स्वादिष्ट होने के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता वर्धक होती है। यह कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करती है, ऐसे में डायबिटीज के रोगियों के लिए विशेष लाभदायक है। सांगरी पाचन तंत्र को तो दुरुस्त करती ही है साथ ही कैल्शियम का भी प्रचुर भंडार है, जिससे हड्डियों को भी मजबूती मिलती है। इसके अलावा एक शोध के अनुसार सांगरी सिंजोफ्रेनिया नामक मनोरोग में भी लाभकारी है। वहीं कैर मरुस्थलीय क्षेत्र में पाया जाने वाला क्षुप है जो कि जोहड़ इत्यादि में बहुतायत में मिलता है। इसे स्थानीय भाषा में टीट भी कहते हैं। आचार एवं सब्जी के रूप में काम में लिए जाना वाला कैर भी औषधीय गुणों से भरपूर है। पेट की बीमारियों में इसका चूर्ण सेंधा नमक के साथ मिलाकर लेने से लाभ मिलता है। सूखे कैर का चूर्ण खाली पेट लेना मधुमेह में लाभकारी होता है। कैर में भरपूर मात्रा में कैल्शियम, आयरन और विटामिन ए पाया जाता है। यह जोड़ों के दर्द, गठिया, बदहजमी और अम्लपित्त इत्यादि पाचन तंत्र के रोगों में विशेष लाभकारी है।

साभार- डॉ. महेश माटोलिया, वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्साधिकारी, राजकीय बीडीके अस्पताल, झुंझुनूं
संकलन- हिमांशु सिंह, जिला जनसंपर्क अधिकारी, झुंझुनूं

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